उफ्फ, मंत्र जाप मालाओं के ये प्रकार

उफ्फ, मंत्र जाप मालाओं के ये प्रकार

मंत्र जाप माला : मंत्र जाप मे उपयोग में आने वाली हर माला का होता है अलग महत्व। हम सभी अपने इष्टदेव को प्रसन्न करने के लिए अलग अलग प्रकार की पूजा पाठ करते हैं इसी कड़ी मे मंत्र जाप भी आता है। हर मंत्र जाप के अलग अलग फ़ायदे होते हैं। इस लिए मंत्र जाप करने के लिए अलग-अलग मालाओं का प्रयोग करना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि अलग अलग मालाओं का क्या महत्व होता है|

तुलसी की माला : तुलसी की माला से देवी मां और भगवान शिव के मंत्र का जाप नहीं किया जाता। तुलसी की माला द्वारा भगवान विष्णु के मंत्र का जाप किया जाता है इसलिए ये माला बहुत महत्वपूर्ण होती है।

 

 

चंदन की माला : चंदन की माला दो प्रकार की होती है, एक सफेद चंदन दूसरा लाल चंदन। दुर्गा माँ के मंत्र का जाप लाल चंदन और भगवान कृष्ण के मंत्र का जाप सफेद चंदन से की माला से किया जाता है|

 

 

 

रुद्राक्ष की माला : भगवान शिव को रुद्राक्ष बेहद प्रिय है। रुद्राक्ष की माला से किसी भी मंत्र का जाप किया जा सकता है। इएलिये महामृत्युंजय का जाप रुद्राक्ष की माला से ही करना चाहिए। वैसे माना जाता इस माला से किसी भी मंत्र का जाप किया जा सकता है।

 

 

 

स्फटिक की माला : स्फटिक की माला का प्रयोग धन प्राप्ति और मन को एकाग्र करने के लिए किया जाता है। माता लक्ष्मी के मंत्र का जाप इसी माला से करना चाहिए। उच्च रक्तचाप में इस माला के पहनने से भी लाभ मिलता है।

 

 

 

हल्दी की माला : मनोकामना पूरी करने के लिए हल्दी की माला का प्रयोग किया जाता है। गुरु बृहस्पति और मां बगुलामुखी के मंत्र का जाप इसी माला से किया जाता है। हल्दी की माला से विद्या प्राप्ति, संतान प्राप्ति और ज्ञान प्राप्ति के लिए मंत्र जाप किया जाता है।

 

 

 

कमलगट्टे की माला : कमलगट्टे की माला का प्रयोग धन वैभव की प्राप्ति के लिए किया जाता है। शत्रुओं के नाश के लिए भी कमलगट्टे की माला का प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह माला मां लक्ष्मी जी को बहुत प्रिय होती है। मंत्र जाप के बाद इस माला को पूजा स्थान में रखना चाहिए।

 

 

किसी भी माला के प्रयोग में ये सावधानियां बरतनी चाहिए।

1 - मंत्र जाप के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि माला पूरी तरह से ढंकी होनी चाहिए।

2 - हर दाने के बाद एक गांठ ज़रूर लगी होनी चाहिए।

3 – मंत्र जाप के लिए उपयोग की जाने वाली माला हमेशा 108 या 27 दाने की होनी चाहिए।

4 – मंत्र जाप के बाद माला मंदिर में रखनी चाहिए।

5 – मंत्र जाप करते समय तर्जनी उंगली का हाथ के पंजे के अन्य हिस्सों से स्पर्श नहीं होना चाहिए।

6 - माला हमेशा अपनी ही उपयोग करनी चाहिए, किसी और को इसका प्रयोग न करने दें।

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