सरकार पर विधायकों के दिखे तेवर

सरकार पर विधायकों के दिखे तेवर

भोपाल (मप्र) : कांग्रेस ने जैसे तैसे करके मध्यप्रदेश में सत्ता पर तो कब्जा कर लिया लेकिन लगता है कि अंदरखाने मचे बबाल से निजात पाने में सफल नहीं हो पा रही है | कांग्रेस के ही बड़े नेता दिग्विजय सिंह ने मंत्रियों के निर्णयों को लेकर नसीहत दी तो मंत्रियों ने दिग्गी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया तो अब अन्य 27 से ज्यादा विधायकों ने मंत्रियो और अफसरान पर तबज्जो न देने का आरोप लगाते हुये अपनी आवाज बुलंद कर दी है | इन विधायकों ने एक क्लब भी बना लिया है तो अपनी नाराजगी मुख्यमंत्री के दरबार में भी दर्ज़ करा दी है | उन दलों के विधायकों ने भी बगाबत करना शुरू कर दिया है जिन्होंने सरकार बनाने में अपना समर्थन दिया है

अभी कमलनाथ सरकार सही तरीके से पैर पर भी न खड़ी हो पाई थी कि आपसी मतभेदों के तुफानो ने सरकार को हिलाना शुरू कर दिया है | दिग्गी की नाराज़गी वाला मसला शांत भी न हो पाया था कि पार्टी एवं अन्य 27 विधायकों ने पहले बैठक की और फिर विधायक क्लब का गठन कर अपने तीखे सुर बुलंद कर दिए है | इस क्लब में विधायक संजय पाठक, संजय शुक्ला, भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद, बैतूल विधायक निलय डागा, रवि जोशी सहित अन्य विधायक शामिल हैं | इन विधायको का सीधा आरोप है कि उनकी सुनवाई न तो मंत्री कर रहें है और न ही हमें अधिकारीयों की तरफ से तबज्जो मिल रही है | हीरा लाल अलावा ( विधायककांग्रेस)। कांग्रेस के अलावा बीएसपी एवं सपा के विधायक भी इस क्लब में शामिल हुये | सभी कि शिकायत है कि सर मंत्रियो के काम हो रहें है अन्य नेताओं ,कार्यकर्ताओं की पूछ परख नहीं है | राम बाई ( विधायकबीएसपी)। इस मसले पर भाजपा ने भी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पर हमला बोलते हुये आरोप लगाया कि विधायकों की नाराज़गी लाज़मी है क्यूंकि सरकार तबादला उद्योग में व्यस्त है और राजधानी में दलालों का बोलबाला है | भाजपा ने दावा किया कि सरकार अस्थिर है और इसके परिणाम जल्द सामने होंगे | डॉ.नरोत्तम मिश्रा (विधायक एवं पूर्व मंत्री,भाजपा)। हलांकि इस मसले पर सरकार में जनसम्पर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने सफाई देते हुये कहा कि न तो कोई विधायक नाराज़ है और न ही किसी ने मुख्यमंत्री से कोई अब तक शिकायत की गई है | शर्मा ने कहा कि सारे लोगो के काम होंगे और सबकी सुनवाई भी होगी | पी.सी.शर्मा (जनसम्पर्क मंत्रीमप्र शासन)। सरकार तो कांग्रेस ने बना ली लेकिन सत्ता और संगठन में सामजस्य बना पाना टेढ़ी खीर साबित होती जा रही है | ज़ाहिर है यदि इसी तरह के हालात रहें तो कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में तो नुक्सान उठाना पड़ सकता है साथ ही सत्ता पर घात लगाई बैठी भाजपा भी मौका मिलते ही बड़ा उलटफेर करने में नहीं चूकने वाली |

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