नई सोच, एक सरकारी स्कूल ऐसा भी

नई सोच, एक सरकारी स्कूल ऐसा भी

बैतल : सावधान आप सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हैं । इस चेतावनी की कल्पना आप किसी गांव के छोटे से सरकारी स्कूल में नहीं करेंगे । लेकिन बैतूल में आठनेर ब्लॉक के ग्राम वलनी के सरकारी स्कूल में ये केवल चेतावनी नहीं बल्कि हकीकत है ।  मध्य प्रदेश के बैतूल में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए एक किसान ने ऐसा काम किया कि उसकी हर जगह चर्चा हो रही है । सरकारी स्कूल की बदहाल शिक्षा व्यवस्थाओं को लेकर हर कोई नकारात्मक सोच रखता है। लेकिन आगे बढ़कर कोई इनमे सुधार करने की हिम्मत नहीं उठाता ।  बैतूल के वलनी गांव निवासी एक आदिवासी किसान नीलेश सलामे ने इस मामले में एक मिसाल कायम की है । नीलेश ने अपने गांव के सरकारी स्कूल को सुधारने और उसे निजी स्कूलों जैसा हाईटेक बनाने के लिए अपने  निजी खर्च पर स्कूल को सीसीटीवी कैमरों से लैस कर दिया है । स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगने से न केवल शिक्षक समय पर आने लगे हैं बल्कि पढ़ाई के स्तर में भी सुधार दिखने लगा है । बच्चों के पालक घर बैठे स्कूल की गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं । नीलेश के इस प्रयास को शिक्षा विभाग से अनुमति दी गई है । वलनी गांव का सरकारी स्कूल पूरी तरह से सीसीटीवी की निगरानी में है । यहां छोटे से स्कूल परिसर में 6 सीसीटीवी कैमरे शिक्षकों और बच्चों की हर गतिविधि पर नज़र रख रहे हैं । सबसे बड़ी बात ये है कि ये कैमरे सरकार या प्रशासन ने नहीं बल्कि गांव के एक किसान नीलेश सलामे ने निजी खर्च पर लगवाए हैं । नीलेश के मुताबिक सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों जैसा सुविधाओं से लैस कर दिया जाए तो यहां के बच्चों को निजी स्कूल नहीं जाना पड़ेगा और गांव का सरकारी स्कूल भी सुधर जाएगा । नीलेश पेशे से किसान है और इलेक्ट्रॉनिक्स का जानकार भी है । उसने पूरे गांव के एंड्रॉयड यूजरों को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सिखा दी है । अब न केवल नीलेश बल्कि गांव का या शहर का कोई भी व्यक्ति वलनी गांव के इस स्कूल पर नज़र रख सकते हैं । इससे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की व्यवस्था तेज़ी से सुधर रही है । स्कूल में कैमरे लगे होने से शिक्षक अनुशासित और सुरक्षित हो गए हैं । अब गांव के उपद्रवी तत्व भी स्कूल में घुसने से डरते हैं । पहले तो जिला प्रशासन ने जब ये प्रयोग सफल होते देखा तो उन्होंने स्कूल को एक कंप्यूटर भी दिया है जिससे सीसीटीवी कैमरों के साथ एक व्यवस्थित कंट्रोल रूम भी बने । समाज मे नीलेश जैसे लोगों की संख्या बेहद कम है वरना बदहाल और उपेक्षित होते  सरकारी संस्थानों की व्यवस्थाएं बेहद चाक चौबंद हो सकती हैं । नीलेश ने साबित किया है कि व्यवस्था को कोसने से नहीं उसमे सुधार करने से परिवर्तन लाया जा सकता है ।

नीलेश सलामे (आदिवासी किसान) का कहना है कि मेरे बच्चे और गांव के बच्चे 12 किलोमीटर दूर प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाते थे। इसको लेकर हमने सोचा कि हमारे गांव का स्कूल कैसे बेहतर हो सके इसलिए हमने अपने गांव के सरकारी स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए । इन कैमरों के माध्यम से मोबाइल पर हम उसकी निगरानी करते हैं । जिसके कारण मास्टर भी समय पर आते हैं और बच्चे भी पढ़ाई करते हैं । अब हम लोगों ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने की बजाय गांव के सरकारी स्कूल में भेजना शुरू कर दिया है । इस कार्य के लिए हमने कलेक्टर से अनुमति ली थी और 50 हजार रुपए की लागत से स्कूल में 6 सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए हैं । कोई भी अपने मोबाइल पर देख सकता है कि स्कूल में पढ़ाई हो रही कि नहीं हो रही । लक्ष्मी देशमुख (टीचर) का कहना है कि कैमरे लगने से बच्चे भी समय पर आ रहे हैं और टीचर भी समय पर आ रहे हैं। अब असामाजिक तत्व भी नहीं आ रहे हैं जो पहले आकर शराब पीकर गाली गलौज करते थे और हम लोगों को परेशान करते थे अब स्कूल की व्यवस्था सुधर गई है। संतोषी पिपरदे (अभिभावक) का कहना है अब बच्चों की पढ़ाई में सुधार हो रहा है हम भी घर में बैठकर मोबाइल पर देख सकते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ रहे हैं या नहीं मास्टर ने पढ़ा रहे हैं कि नहीं। बीएस बिसोरिया(जिला शिक्षा अधिकारी) का कहना है कि वलनी गांव में एक किसान ने जो प्रयास किया वो सराहनीय है इससे स्कूल की व्यवस्था भी सुधरी है । इस तरह के जनसहयोग के प्रयास और भी स्कूल में करने की योजना है ।

 

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