आस्था या अंधविश्वास

आस्था या अंधविश्वास

 नरसिंहपुर (मप्र) :  कहते है आस्था अंधी होती है जी हाँ आस्था के आगे सब कुछ बोना लगता है और आस्था से जुड़े ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जिन्हें देख कर हर कोई ये कहने को मजबूर हो जाएगा कि ये कैसी आस्था है या फिर कुछ लोग इसे कहेंगे कि यह आस्था नही अन्धविश्वास है तो, आइए हम भी आपको एक ऐसी खबर दिखाते है जिससे देखकर आप भी यह सोचने मजबूर हो जायेगे की इसे क्या नाम दे आस्था या अन्धविश्वास। 

यह है मध्यप्रदेश की नर्मदा नदी की है जिसे लोग जीवनदायनी कहते है इतना ही नही लोग उसे नर्मदा में बहते पानी नही जीवनदायनी माँ के रूप में भी देखते है और इसी नदी का यह है बिलथारी घाट जो नरसिंहपुर जिले की तेन्दूखेड़ा तहसील में आता है और यह है बाबा पट्टी बाले जो आज होलिका दहन के समय नर्मदा नदी के इसी घाट पर जल समाधि लेने वाले थे बाबा का कहना है कि उन्हें पुलिस नही लाती तो वे जलसमाधि ले लेते। बाबा कलगिरी उर्फ पट्टी बाले । वहीं बाबा के भक्तों की भी इस दौरान भारी भीड़ देखी गई लेकिन पुलिस के आते ही भीड़ यहाँ वहां हो गई लेकिन बाबा के कुछ भक्त बाबा के साथ ही रहे और जैसे ही बाबा के बारे में पता चला तो बाबा के भक्त बाबा के पास आ गए हालांकि बाबा के भक्तों का कहना है कि बाबा आज शाम 4 बजे जल समाधि ले रहे थे। हालांकि जैसे ही इस मामले की खबर पुलिस को लगी तो आनन फानन में पुलिस मौके पर पहुँची और बाबा को नर्मदा के घाट से उठाकर स्थानीय अस्पताल में भर्ती करा दिया। मोहंती मराबी (जांच अधिकारी पुलिस) वहीं जब डॉक्टरों ने बाबा का स्वास्थ्य परीक्षण किया तो बाबा को कमजोरी होना बताया गया है और कुछ दिनो के लिए अस्पताल में भर्ती कर लिया है। ए आर मिश्रा, मेडिकल ऑफिसर अब एक 60 साल के बुजुर्ग का जल समाधि लेने को आप क्या कहेंगे आस्था या अंधविश्वास बहरहाल। जो भी हो लेकिन आज तो पुलिस की सक्रियता के चलते आस्था के नाम पर होने वाली एक घटना घटने से टल गई लेकिन फिर भी सवाल यही उठता है की इसे क्या नाम दे आस्था या फिर अंधविश्वास।

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