पहलवानों का झलका दर्द

पहलवानों का झलका दर्द

बैतूल (मध्यप्रदेश) | मध्य प्रदेश के बैतूल में हुए दंगल में आये पहलवानो का दर्द छलक उठा। देश प्रदेश में आज भी लड़कियों, महिलाओ के लिए सुरक्षा का माहौल नही है। नेता बोल देते है लेकिन होता कुछ नही है। जैसा फिल्मो की रील लाइफ में लड़कियों को अकादमियों में रेसलिंग करते दिखाया जाता है। वैसा रियल लाइफ में कुछ नही होता। न खाने को ढंग की डाइट, न अच्छे कोच ,न अच्छा मैट। अगर आज अखाड़े नही होते तो शायद कुश्ती खत्म हो जाती। न सरकार कुछ करती है और न नेता। ये दर्द उन लड़कियों का है जो आज कुश्ती की रिंग में अपने दांव के जौहर दिखा रही है। लेकिन विडम्बना है कि सुरक्षा से लेकर सहायता तक हर कहीं सिर्फ लफ्फाजी है।

बैतूल में आयोजित राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में देश के कई प्रान्तों से जुटी महिला और पुरुष रेसलरों ने आज यहां अपने दांव पेंचों के हुनर दिखा कर सबको खूब आनंदित किया। इस बीच युवतियों की रेसलिंग को लेकर समझ और उत्साह देखते ही बना। यहाँ बुधनी और इंदौर से पहुंची युवतियो ने पुरुष पहलवानो तक को मैट पर पटखनी देकर अपनी ताकत का अहसास कराया। इस बीच युवतियों ने महिला रेसलिंग को लेकर आ रही दिक्कतों का जिक्र किया। महिला सुरक्षा को लेकर जहा युवतियां चिंतित दिखी वही उन्होंने खुद पर अपनी सुरक्षा को लेकर आश्रित रहने की बात कही है। लड़कियों ने कहा कि फ़िल्म में जैसा दिखाया जाता है यहां ऐसा कुछ नही है। सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए। बीते तीन ओलंपिक में कुश्ती से आये मेडलों का जिक्र करते हुए पहलवानो ने इस बात की हिमायत की एकेडमी, सुविधाओ और कोच की कमी खलती है। 

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