शौचालय या घर

शौचालय या घर

सतना (मप्र) :बरस पहले जब स्वच्छ भारत अभियान के तहत बुटनिया साकेत के घर पर मझोले बेटे के हिस्से में शौचालय बना था तो उसने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन वही शौचालय उसका आशियाना बन जाएगा। जिस उम्र के नाजुक पड़ाव में बेटे बुजुर्ग मां-बाप के सहारे की लाठी बनते हैं उस उम्र में एक अभागन मां अपने बेटों पर बोझ बन गई। अपनी-अपनी पत्नियों के बहकावे में आकर बेटों ने साल भर पहले अपनी बूढ़ी मां को घर से बेदखल कर दिया। अब उसका आशियाना यही तंग शौचालय है। इसी शौचालय में ही बूढ़ी मां की छोटी सी गृहस्थी बसती है। यह पूरा मामला है मध्यप्रदेश में सतना जिले के अमरपाटन विकासखण्ड अंतर्गत बर्रेह गांव का है जहां एक मां अपने तीनों बेटों की वजह से एक शौचालय में रहने को मजबूर है।

मामला जिले के अमरपाटन क्षेत्र के बर्रेह बड़ा ग्राम का है। जहा माँ और बेटे के रिश्ते के बीच दरार की वजह बनी बहू ने मां को शौचालय में रहने को मजबूर कर दिया। नतीजतन माँ आज वृद्धावस्ता मे अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रही है और तीन तीन पुत्रो को जन्म देकर भी किसी ऐसे समाजसेवी या फिर सरकार से अदद न्याय की आश बनाये रखी है। माँ से जब पूरे मामले पर बात की गई तो माँ बड़े असहज स्थिति मे बताया की घर पर में और मेरा बड़ा बेटा व उसकी पत्नी रहती थी। मेरी बहु हर रोज झगड़े करती जिससे निजात पाने मे इसी शौचालय मे गुजर बसर कर रही हूँ।  वही 65वर्षीय वृद्ध माँ बिटनिया साकेत के छोटे पुत्र से उसके माँ के शौचालय में रहने के कारण की जानकारी पूछी तो वह खुद की जुम्मेदारी से बचते हुये पूरा आरोप बड़े भाई पर लगाने लगा। खुद के घर को छोड़ शौचालय में जिंदगी गुजर बसर कर रही 65 वर्षिय वृद्धा के पति की वर्ष पुर मृत्यु हो चुकी है। तीनो पुत्रो का बटवारा भी हो चुका है माँ पहले बड़े भाई के पास रहती थी परंतु बहु ने घर से उसे बाहर निकाल दिया। माँ बेटो से अलग हो कर उसी शौचालय मे घर बना कर खाना बनाती और खाती है। वही सोती है इतना ही नहीं पिछले दो सालों से शौचालय को घर बना रखी वृद्ध महिला शौच के लिए खुले मे जा रही है। इन तरह अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रही वृद्ध माँ आज पति की मौत के बाद पुत्र और गृहस्थी दोनो से विहीन हो चुकी है।

हालांकी माँ की स्थित देख यह बात मन मे जरूर खटक रही है कि सरकारी योजनाए क्या धरातल मे आज भी नही उतर सकी। योजनाएं यदि आम जनता को नहीं मिल रही है तो उसकी राशि कहा जा रही है। क्योंकि जिस स्वच्छता मिशन के तहत भारत की बात सरकार तरफ से घर घर-शौचालय निर्माण किया जा रहा है। वह तो उपयोग ही नहीं हो रहा हितग्राही खुले में शौच जा रहा है शौचालय अब आशियाना बन गया। 

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