उफ्फयह, पन्ना की होली

उफ्फयह, पन्ना की होली

पन्ना (मप्र) : मन्दिरों की नगरी पन्ना में रंगों के पर्व होली को बड़े ही अनूठे अंदाज में मनाया जाता है।  बृज और वृन्दावन की तरह पन्ना में भी कृष्ण भक्ति परंपरा के विशेष त्यौहार होली को धूमधाम से मनाने की परम्परा है। जिसका निर्वहन आज भी उसी तरह किया जाता है। प्रणामी सम्प्रदाय के सबसे बड़े तीर्थ पन्ना धाम में  किलकिला नदी के निकट  एक ओर राधिका रानी का मंदिर है जिसे बरसाना कहते हैं वहीं दूसरी ओर कुछ दूरी पर कृष्ण और कृष्णलीला को केन्द्र में रखकर एक बृम्ह चबूतरे की स्थापना है जहां श्री प्राणनाथ श्री कृष्ण की समस्त शक्तियों के साथ पूर्णबृम्ह परमात्मा के रूप में विराजमान हैं। इस क्षेत्र को बृजभूमि और परम धाम कहते हैं। यहां बृज, बृन्दावन और बरसाने की तरह पारम्परिक होली मनाई जाती है। पन्ना पुरी धाम मे रंगो से नही बल्कि गुलाब की पंखुडियो और केशू नामक फूल से होली खेली जाती है। होलिका दहन की स्थापना के साथ-साथ पन्ना धाम के मंदिरों में होली उत्सव की तैयारी शुरू हो जाती है। होलिका दहन स्थापना के दिन को मोहन होरी पर्व के रूप में मनाया जाता है। पन्ना धाम के मंदिरों में संध्या आरती के पश्चात दण्ड स्थापना की परंपरा है, लंबे गीले बांस  में लाल रंग की पताका लगाकर उसे किलकिला नदी के किनारे एवं ग्वालनपुरा में निर्दिष्ट स्थान हैं जहां होली रचाई जाती है।  मोहन होरी की रात्रि में सबसे पहले धामार गीत गाया जाता है। कृष्णपक्ष के दिन गुम्बटजी एवं बंगला जी में होरी गीतों का सुमधुर गायन होता है रात्रि 9 बजे गुम्बट जी के प्रांगण में भक्त गण इकट्ठे  होते हैं उत्सव प्रारंभ होता है। अरविंद शर्मा (सुन्दरसाथ) होलिका दहन के दिन श्री महारानी जी राधिका जी के मंदिर में विशेष श्रृंगार होता है। रात्रि में भोग लगने के पश्चात लगभग 10 बजे महारानी के मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालु एकत्रित होने लगते हैं  फिर फाग गायन का कार्यक्रम प्रारंभ हो जाता है। परिकल्पना यह है कि यहां राधा और कृष्ण मिलकर परस्पर भाग खेलते हैं। समस्त सुन्दरसाथ सखियों के रूप में गीत गाते हुये इस फाग उत्सव में सम्मिलित होते हैं। नरेन्द्र सिंह (गुजरात से आये सुन्दरसाथ)।  देर रात तक यहां  रंगारंग कार्यक्रम चलता रहा उत्सव और उल्लास के इस अनूठे आयोजन का हिस्सा बनने के लिये देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पन्ना धाम पहुँचते हैं। यह होली की परम्परा सदियों से चली आ रही है| हजारो की संख्या मे सुन्दरसाथ पन्ना धाम मे होली का त्यौहार मानाने के लिये आते है और होली के उत्सव का आनंद लेते है।  सुष्मिता (विदेश से आई सुन्दरसाथ)

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