अन्ना का अनशन

अन्ना का अनशन

महाराष्ट्र | लोकपाल को लेकर ठीक चुनाव से पहले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है | ज़ाहिर है कभी इसी आंदोलन ने यूपीए की सरकार को सत्ता से उतार फेंका था ऐसे में एनडीए सरकार का बीपी बढना लाज़मी है | हालांकि वक्त के साथ अन्ना का असर बहुत कम हुआ है लेकिन इसमें भी कोई शक नही कि अन्ना का अनशन इस मुद्दे को फिर से जीवित तो कर ही सकता है | ताज़ा खबर के अनुसार सामाजिक  कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) एक बार फिर आंदोलन कर रहे हैं। उनका अनशन महाराष्ट्र के अपने गांव रालेगण सिद्धि में शुरू हो चुका है। इससे पहले अन्ना ने मंगलवार को कहा कि मेरा अनशन किसी व्यक्ति, पक्ष, पार्टी के खिलाफ नहीं है। समाज और देश की भलाई के लिए बार-बार मैं आंदोलन करता आया हूं, उसी प्रकार का ये आंदोलन है। केंद्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लोकपाल कानून बने 5 साल हो गए और सरकार पांच साल से सिर्फ बहानेबाजी करती आ रही है। बता दें कि 2011-12 में हजारे के नेतृत्व में दिल्ली के रामलीला मैदान पर तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। 

भ्रष्टाचार रोधी संस्था लोकपाल के सदस्यों को चुनने के लिए गठित आठ सदस्यीय समिति ने मंगलवार को अपनी पहली बैठक की। मोदी सरकार द्वारा इस समिति का गठन किए जाने के करीब चार महीने बाद यह बैठक हुई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 

इस बैठक से कुछ दिन पहले उच्चतम न्यायालय ने इस समिति के लिए उन नामों का पैनल भेजने के लिए फरवरी के अंत तक की समय सीमा तय की थी, जिन नामों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति द्वारा लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्य के रूप में नियुक्त करने के लिए विचार किया जा सके।

शीर्ष अदालत ने 17 जनवरी को नाम सुझाने वाली समिति को अपना विचार विमर्श पूरा करने तथा लोकपाल अध्यक्ष और सदस्यों के उम्मीदवारों के नामों की सूची की सिफारिश फरवरी के अंत तक करने को कहा था। गौरतलब है कि कुछ खास श्रेणी के लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों पर गौर करने के लिए केन्द्र में लोकपाल तथा राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था करने वाला लोकपाल कानून 2013 में पारित हुआ था। 

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