होने थे फेरे लेकिन दुल्हन का हाथ पकड़ किधर चला दूल्हा

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<मंडप सजा था ...बाराती भी थे जमा  ....उत्साह था चरम पर और खुशियाँ थी जवां ...तभी अचानक दूल्हे की नज़र पड़ी दुल्हन उँगलियों पर ...देखते ही चौंका ...चेहरे के भाव बदले ...कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही अपनी  दुल्हन का पकड़ा हाथ और मंडप के बाहर खड़ी गाड़ी पर सवार हो ...कर दिया कूच .... | 
बाराती हों या फिर घराती घबरा गए ...सवाल सिर्फ एक ...आखिर हुआ क्या ...| 
लेकिन साहब ... जब  इस घटनाक्रम के पीछे की असल वजह सामने आई तो सभी गर्व से कह बैठे ...उफ़्फ़ ,क्या बात है | 
पूरा मामला बैतूल से 12 किलोमीटर दूर लापाझिरी गाँव का है | शादी के फेरे से ठीक पहले दूल्हे विजय  को पता चला कि दुल्हन भुवनेश्वरी  ने तो वोट ही नहीं किया |मतदान की अहमियत  समझता था  ...विजय | फेरों से ज्यादा विजय को वोट करना  महत्ब्पुर्ण लगा |  झट फैसला  ...बस फिर क्या था ...बगैर समय गावाए ...तत्काल अपनी होने वाली जीवन संगनी का  पकड़ा हाथ और मतदान केंद्र जाकर लोकतन्त्र मजबूत करने की भूमिका को अदा किया | 
यह है असल देश प्रेम और जागरूक नागरिक होने का सौ फीसदी परिचय | काश विजय - भुवनेश्वरी की तरह सोच सभी की हो जाये तो इस  देश के विकास की  बेहतरीन इबारत लिखने से कोई नहीं रोक सकता |

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