क्यों हैं बैचेन ? मुख्यमंत्री कमलनाथ

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<सत्ता वापिसी की मंशा पाले #कांग्रेस खुश थी | सब कुछ ठीक से हो इसलिए   #मप्र के #मुख्यमंत्री को अन्य दलों के साथ समन्वय बनाने की बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई  । बड़े कद को लेकर #कमल बाबू खुश...
लेकिन Exit_poll ने #मुखिया_जी की नींद उड़ा दी । और यहां अतिउत्साहित भाजपाई उछलकूद मचाने लगे । 
अब #कमल_बाबू ने #दिल्ली से साफ साफ कह दिया .... तुम अपनी रोटी खुद सेंक लो..यहां मेरा बना बनाया #रायता फैलता दिख रहा है .
दरअसल मीडिया द्वारा जारी एग्जिट पोल की असल पोल तो 23 मई को खुलेगी लेकिन उससे पहले परिणाम को लेकर पूरी तरह से आशान्वित मप्र की भाजपा ने तीखे तेवर अखितयार कर लिए हैं । 
हमेशा की तरह बाबा कैलाश विजयवर्गीय ने मप्र सरकार  की उम्र सिर्फ 22 दिन और तय कर दी है । 
तो दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को खत लिख दिया | गोपाल भार्गव का  सरकार की स्थिरता पर भरोसा न रहा | मांग की है कि मप्र विधानसभा का सत्र बुलाकर फ्लोर टेस्ट करवाया जाए |  
बाईट - गोपाल भार्गव । 
खुद कमलनाथ भी असहज है तो स्थिति को देखते हुए ...मप्र सरकार के मंत्री सफाई पर सफाई पेले जा रहें हैं । 
खैर ..सबकी निगाहें आम चुनाव के परिणामों पर टिकी हैं । यदि पर्दे पर मोदी रिटर्न्स उभरता है तो ...भैया मान लो...कमल बाबू की राह आसान नही 
वैसे कमल बाबु अपने रायता को बचाये रखने के हर सम्भव प्रयास में जुटे है लेकिन मोदी का डंका वज़ा  तो कमल बाबू का रायता फैले या न फैले लेकिन  उसका  खट्टा होंना  तो तय है

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