उफ़्फ़..मझधार में फंसी कमलनाथ सरकार

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<चंद महीने पहले ही कांग्रेस के आंगन में जिस जीत की खुशी ने डेरा डाला था उफ़्फ़...आम चुनाव परिणामों ने उस खुशी को विदा कर "चिंता" का बसेरा कर दिया है । 
जी हां बात कमलनाथ सरकार की ...

 आप मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों,कांग्रेस नेताओं के चेहरे पढिये साफ साफ सवाल नजर आएगा ...कि आखिर सरकार कब तक ?
अफसरान भी अपनी खोलों में सिमटे पड़ें हैं कि सरकार की स्थिरता बने तो अपनी टांग पसारे । 
कांग्रेसी - अफसर तो ठीक । यहां तो उचित दामों में सरकारी काम का ठेका लेने वाले बंधुवर भी अपनी दुकान की शटर न उठा पा रहें है । 
इधर भाजपा का एक धड़ा है जो बहुत जल्दबाजी में हैं,उसे सत्ता से बाहर रहना असहज कर रहा है तो दूसरा खेमें की सोच है कि कांग्रेस सरकार गिराने से बेहतर है कि खुद लड़खड़ा कर गिर जाए ताकि दमदारी से वापिसी हो । 
यहाँ..नाथ अब अकेले दिख रहे हैं । मप्र से जुड़े कांग्रेस के दिग्गज नेता तो पहले से ही अनमने थे ..हार के बाद तो राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी तीखे तेवर दिखा दिए । 
इन सारे समीकरणों के बीच प्रदेश की जनता है । विकास के कार्य ठप्प हैं तो जारी योजनाओं पर जैसे की ग्रहण लग गया हो ।
चौक चौराहों चौपालों पर सिर्फ एक चर्चा...सरकार रहेगी या फिर होगी विदाई ? 
अब आचार संहिता खत्म हो चुकी है ..कामकाज को लेकर सरकार के सारे बहाने बंद !
यदि अब भी कमलनाथ सरकार अपना भरोसा आम जन के बीच कायम न कर पाई तो यह तय है कि दीवाली से पहले भाजपा अपने पटाखे फोड़ने से गुरेज न करेगी..।

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