उफ़्फ़यह...जल्दबाजी

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मध्यप्रदेश : इसे कहते है दबाब...काम का कहिये या फिर चुनावी समीकरण संतुलित करने का .. हां आप इसे अपरिपक्वता भी कह सकतें हैं । नया मसला लीजिये..कमल को शिव से खफ़ा कंप्यूटर बाबा को साधना था और यहां चुनाव आचार संहिता लागू होने वाली थी । तय हुआ...और नदी न्यास के अध्यक्ष का झुनझुना बाबा को पकड़ा दिया गया । बेक डेट के खेल के चक्कर में सरकार भूल गई कि आदेश की तारीख एक साल पुरानी दर्ज कर दी गई है । हंसिये मत...आदेश जारी होने की जो तारीख है...उस समय सत्ता में कांग्रेस थी ही नही । क्या करें साहब....नयी नवेली सरकार है... गलती जैसी भी हो ...आदेश की तारीख को लेकर सरकार की अधीरता सामने ज़रूरआ गई है । छोड़िए न साहब ....तभी तो कहा जा रहा है कि यह वक्त है बदलाव का

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