यह देखकर.. उफ़्फ़, शर्म आएगी

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जहां आज देश में डीजीटल इंडिया ...स्मार्ट सिटी का गाना खूब गाया जा रहा हो लेकिन असल भारत की तस्वीर आपको सोचने पर मजबूर कर सकती है कि क्या विकास सिर्फ कागजों तक ही सीमित है | बात शायद आपको न पचे लेकिन अनुपपुर की ओर रुख करिए ...जहां से अल सुबह पानी भर के लाते ग्रामीण ...क्या बच्चे,बूढ़े या फिर महिलायेँ ...सभी के हाथो में पानी भरने वाले वर्तन ...| लंबे जोखिम भरे रास्तों पर चलती जिंदगी ...| पथरीले रास्तों पर चलने के वजह से पैरों में पड़ गए छाले ....| आँखों में थकन तो पेशानी पर मजबूरी ...| सारी कवायद ...प्यास बुझाने की | जी हाँ ...यह नज़ारा आम होता है ...अनुपपुर जिले के आदिवासी अंचल पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ...| कई गाँव है ऐसे जो बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज हैं | स्थिति आज की नहीं ...बरसों पुरानी है | दादा परदादा के जमाने से..... लेकिन आज तक विकास नाम का साया ...यहाँ गलती से न फटका | सुबह होते ही पहली चिंता होती है ...पानी की | पहाड़ी लांघकर पाँच से छ्ह किमी चलकर न जाएँ तो पीने का पानी भी मयस्सर न हो | 20 से 30 लीटर पानी अपने सर पर रखकर लाना होता है | दिन के चार से पाँच घंटे तो पानी की व्यवस्था में ही निकल जाते है | जान जोखिम में डालकर भी यह गारंटी नहीं कि पानी पर्यपात मिल पाएगा | ऐसा नहीं है कि शासन - प्रशासन रुख न करता हो यहाँ का ...| होता है साहब ज़रूर आगमन होता है लेकिन नेताओं का सिर्फ चुनाव के वक्त और अधिकारियों का नेताओं के आने समय ...| बाकी तुम जानो ...तुम्हारी जिंदगी | सरकारों द्वारा विकास का जो खाका खींचा जाता है उसकी सच्चाई को लेकर सवाल उठते रहते हैं | लेकिन साहब आज़ादी के सालों बाद भी यदि देश में लोगों को पीने का पानी उपलब्ध न हो तो ....उफ़्फ़ यह ,,यह बेहद शर्मनाक स्थिति है |

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