उफ्फयह, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

उफ्फयह, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

खास बात : आज सुबह से जहां नज़र डालो, चाहे अख़बार हो, टीवी हो या ऑफिस के लिए निकलते समय दिखने वाले होर्डिंग्स हों, सभी नारी शक्ति के विचारों से सटे पड़े हैं। फिर याद आया कि हाँ आज तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। महिलाओं के सम्मान का दिन, जीवन में महिलाओं के महत्व का दिन। लगा कि क्या महिला की भूमिका और समर्पण को साल में एक दिन ही याद किया जाना काफी है? क्या साल के बाकी दिन महिलाएं इस मान-सम्मान की हक़दार नहीं? फ़िर अपने-आप को समझाया कि नहीं ऐसा नहीं है, महिलाओं के जीवन में महत्व और समर्पण को तो सभी जानते और मानते हैं लेकिन उसे जताने के लिए एक ख़ास दिन की ज़रूरत है।

नारी सम्मान में आज जितने भी विचार प्रकाशित हुए हैं उनमें पुरुष वर्ग ने बढ़-चढ़ कर अपनी उपस्तिथि दर्ज़ कराई है। कोई कह रहा है कि जादू है, रौनक है, संवार है स्त्री, कोई कह रहा है प्रकृति के हर रूप में स्त्री होती है, तो कोई कहता है कि स्त्री ही मकान को घर बनाती है, किसी के विचार में स्त्री सा दोस्त और सलाहकार कोई और नहीं, स्त्री अन्नपूर्णा है, स्त्री ही ममता है और पता नहीं क्या-क्या।

लेकिन क्या वास्तव में हम हमेशा अपने इन्हीं विचारों पर अडिग रहते हैं, अगर हां तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। तो आइये अपने इन्हीं विचारों के साथ एक बार फिर आप सभी को महिला दिवस की ढेरों शुभकामनाएं।

 

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