फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला आया सामने

फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला आया सामने

मध्यप्रदेश : बुरहानपुर का बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले मामला गहराता जा रहा है। जिसमें फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला सामने आया है। प्रदेश के व्यापम जैसा मिनी शिक्षक भर्ती घोटाला बताया जा रहा है। 2013 में व्यापम के फर्जी दस्तावेज लगाकर शिक्षक की नियुक्तियां की गई थी। साथ ही फर्जी शिक्षक सरकार से करोड़ो का वेतन प्राप्त कर चुके है। इसके लिए कई जिम्मेदार अधिकारी भी संदेह के घेरे में है जिन पर भी कुछ दिन में कार्यवाही हो सकती है। फर्जी दस्तावेजो, शाला में गैर हाजिर रहकर वेतन आहरण करने वाले करीब 67 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। लेकिन अब इस मामले में जांच समिति को वेतन आहरण कराने वाले, यूनिक आईडी देने वाले और नियोक्ताओं की जांच के आदेश दिए गए। जिसमें जांच समिति ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी आरएल उपाध्याय, वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी पीएन पाराशर, बुरहानपुर जनपद पंचायत के वर्तमान सीईओ अनिल पवार, दो तत्कालीन सीईओ राकेश शर्मा, आरएन अरण्य व शिक्षा विभाग के दो बाबु ज्योति खत्री, देवानंद भट्ट के खिलाफ पुलिस को एफआईआर करने के लिए पुलिस को पत्र लिखा है लेकिन बावजूद इसके पुलिस के ढीले रवैये के चलते घोटाले के आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर है। ऐसा माना जा रहा है पुलिस इस मामले की जांच की में कोई रूचि नहीं ले रही है। इस बहुचर्चित फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में पहली गिरफ्तारी हुई है, 28 दिसंबर को जनपद पंचायत सीईओ ने 7 शिक्षकों के खिलाफ फर्जी व्यापंम प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नौकरी पाने की शिकायत की थी। इन 7 शिक्षकों में से कोतवाली पुलिस ने 3 आरोपी शिक्षक मोरेश्वर, गणेश और संदीप को गिरफ्तार किया है पुलिस शेष शिक्षकों की गिरफ्तारी को लेकर सरगर्मी से उनकी तलाश कर रही है। हाल ही में इस घोटाले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, तीन जनपद सीईओ व दो बाबुओं के खिलाफ एफआईआर किए जाने पर पुलिस का कहना है जिला पंचायत से आरोपितों के खिलाफ वानछीत दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद ही उनके खिलाफ एफआईआर की जाएगी।

 

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