प्रचार का अनूठा नजारा

प्रचार का अनूठा नजारा

बैतुल (मप्र) : पूरे देश मे इस समय जहां राजनैतिक पार्टियों के चुनाव प्रचार की धूम मची हुई है तो इधर बैतूल में एक अलग और अनूठा नजारा देखने को मिला है। यहां  76 साल के एक रिटायर शिक्षक अपने साथियों के साथ नोटा का प्रचार करते नजर आ रहे है। पूरे शरीर पर फ्लेक्स बांधकर लोगो से नोटा की बटन दबाने की अपील कर रहे रिटार्यड शिक्षक बीआर घोरसे और उनके साथी बाजार ,गली मोहल्लों और आम लोगो तक पहुंचकर आने वाले 6 मई को बैतूल लोकसभा इलाके में होने वाले मतदान के दिन नोटा की बटन दबाने को कह रहे है। इसके लिए वे अपने साथ लाये एक पम्पलेट में इसकी वजह भी बता रहे है। नोटा बटन दबाने की वजह बताता उनका पम्पलेट लोगो मे खासा पढ़ा जा रहा है। वे अब तक 20 हजार पम्पलेट बांट चुके है। घोरसे और उनके साथियों को इस भेष में जी भी देखता है थोड़ी देर के लिए वह ठिठक जाता है जबकि घोरसे और उनके साथी चिल्ला चिल्ला कर नोटा को समर्थन देने की अपील करते हैं।  दरअसल 16 साल पहले रिटायर हुए शिक्षक घोरसे को अब तक पेंशन ,ग्रेज्युटी और पेंशनर को मिलने वाली बाकि अन्य सरकारी सुविधाएं नही मिल सकी है। जिसके चलते वे राजनैतिक दलों से नाराज है। जबकि उनके युवा साथी बैतूल में बीते दस साल से सांसद रही ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताकर पार्टियों का विरोध कर रहे है। उनका कहना है कि दलो के उम्मीदवार चुनाव के बाद आम आदमी के प्रत्यासी न होकर पार्टी के प्रत्यासी और पार्टी की सुध लेने वाले बन जाते है। हालांकि लोग नोटा के इस प्रचार को गैर जरूरी बता रहे है। आपको बता दे कि पिछले विधानसभा चुनाव में बैतूल जिले की पांच विधानसभा सीटो पर 21 हजार से ज्यादा मतदाताओ ने नोटा बटन का इस्तेमाल किया था। बीआर घोरसे (रिटायर्ड शिक्षक) का कहना है कि अब तक पेंशन ,ग्रेज्युटी और  पेंशनर को मिलने वाली बाकि अन्य सरकारी सुविधाएं नही मिली है। वहीं रिंकू सक्सेना (घोरसे का साथी) का कहना है कि राजनैतिक दलों से जीतने वाले प्रत्याशी अपने दल के प्रत्याशी बन जाते है वो जनता के प्रत्याशी नही रह जाते। गोलू सोनी (स्थानीय नागरिक) का कहना है कि नोटा का प्रचार गलत है कोई मतलब नही है कोई वोट डालता है तो सोच समझ कर ही डालता है।

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