आईपीएस राजेंद्र मामले में डॉक्टर का बयान

आईपीएस राजेंद्र मामले में डॉक्टर का बयान

भोपाल (मप्र) : प्रदेश के एक सीनियर पुलिस अधिकारी आईपीएस राजेंद्र कुमार मिश्रा पर एक महीने से घर में पिता का शव रखने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि पिता की मौत एक महीने पहले हो चुकी है। निजी अस्पताल ने उनका मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया। राजेन्द्र मिश्रा के पिता का इलाज करने और मौत का प्रमाण पत्र जारी करने वाले Dr सत्पथी का बयान ने एक बयान जारी किया है। Dr सत्पथी ने बताया, राजेन्द्र ने पिता का शव अस्पताल से घर ले जाने के 48 घंटे और 72 घंटे के बाद घर बुलाया था। जब गया तब भी मेने बता दिया था कि उनकी सांस थम चुकी है। मैंने राजेन्द्र को कहा तुम्हारे पिता की क्लीनली डेथ हो चुकी है। 72 घंटे बाद जब गया तब तक शव में सिकुड़न शुरू भी हो चुकी थी। 'राजेन्द्र मिश्रा ने मुझसे कहा था कि पिता ने 50 साल हमे पाला क्या मैं उन्हें मैं कुछ दिन नही रख सकता।'
Dr सत्पथी ने बताया, बॉडी को एक महीने से ज्यादा से समय हो गया है। बॉडी में दो तरीके से सड़न होती हैेे। एक तो नमी से सड़ता है शव और दूसरा डिहाइड्रेशन से सूख जाता है यानी ममीफाई होता है शव। राजेन्द्र के पिता का शव ममीफाई हो रहा है। आईपीएस राजेन्द्र मिश्रा को अब समझाना होगा। जो रिश्तेदार या क्लोज लोगो है उन्हें राजेन्द्र के घर भेजना होगा और उसे समझाना होगा की उसके पिता इस दुनिया में नही है। तभी इस मामले का समाधान होगा। वरना यह बहुत मुश्किल भरा हो सकता है। डॉक्टर सत्पथी ने इस बात का दावा किया है कि बंसल हॉस्पिटल में जब उसके पिता को मृत घोषित कर दिया था लेकिन राजेंद्र मिश्रा ने 48 घंटे बाद मुझे अपने घर बुलाया और पिता की जांच कराई थी। जिसके बाद डॉक्टर सत्पथी ने भी उन्हें मृत घोषित किया था। लेकिन आस्था के चलते और पिताजी से लगाव के चलते आईपीएस राजेंद्र मिश्रा इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है। डॉक्टर सत्पथी ने यह भी कहा है कि ऐसे मामले में या तो इसे हम आस्था कह सकते हैं और मानसिक रूप से असंतुलित भी कह सकते हैं।

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