उफ्फ, ऐसें हौसले को सलाम

उफ्फ, ऐसें हौसले को सलाम

(बैतूल मध्यप्रदेश)| मध्य प्रदेश के बैतूल के भैंसदेही महाकाल क्रिकेट क्लब द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय टेनिस बॉल प्रतियोगिता में एक ऐसा खिलाड़ी देखने को मिला जो बैसाखी के सहारे इस क्रिकेट टूर्नामेंट में मैदान पर उतर गया वैसे तो क्रिकेट बिना पैरों के और बिना हाथों के खेला नही जा सकता है लेकिन यह युवा खिलाड़ी एक पैर नहीं रहने के बाद भी क्रिकेट मैदान पर बड़ी निडरता के साथ बैसाखी लेकर उतर गया। जैसे ही मनीष अटल बिहारी वाजपेई स्टेडियम में बैसाखी के साथ मैदान पर उतर गए वैसे ही क्रिकेट मैदान पर देखने वाले दर्शक आश्चर्यचकित हो गए कि बिना पैर के यह लड़का कैसे मैच खेलेगा मनीष ने पूरे 10 ओवर तक क्रिकेट मैदान पर बैसाखी के सहारे मैच खेला इतना ही नहीं मनीष ने गेंदबाजी भी की और दो विकेट भी लिए उसके बाद मनीष बैसाखी के सहारे बल्लेबाजी पर उतरे और उन्होंने 15 रन बनाए जिस तरह से मनीष बैसाखी के सहारे क्रिकेट खेलते हैं यहां एक खेल भावना का परिचय दिखता है । हालांकि क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो सबके मन को छू लेता है ऐसा ही भैंसदेही के अटल बिहारी वाजपेई स्टेडियम में दखने को मिला जब मनीष बैसाखी के सहारे मैदान पर उतरे ओर मैच खत्म होने के बाद सभी दर्शकों ने मनीष से हाथ मिला कर उनके जज्बे को सलाम किया। मनीष का कहना था कि वह बचपन से ही क्रिकेट का शौकीन है और उसे क्रिकेट काफी पसंद है वह बचपन से ही क्रिकेट खेल रहा है लेकिन एक एक्सीडेंट के दौरान उसका पैर कट गया था जिसके बाद वह क्रिकेट नहीं खेल पा रहा था लेकिन क्रिकेट उसका सबसे मनपसंद खेल था उसे खेलने के लिए वह रोजाना बैसाखी के सहारे प्रैक्टिस करने लगा बैतूल में रहकर मनीष ने बैसाखी के सहारे कई क्रिकेट टूर्नामेंट में मैन ऑफ द मैच और मेडल भी प्राप्त की है इतना ही नहीं उसे कई प्रमाण पत्र भी मिले हैं मनीष का कहना है कि विकलांगों के लिए सरकार के द्वारा खेल कूद का महत्व नहीं दिया जा रहा है अगर हम जैसे विकलांग लोग खेलकूद मैं अपना हुनर दिखा सकते हैं लेकिन सरकार विकलांगों के लिए खेलकूद जैसी प्रतियोगिता आयोजित नहीं करती जिसके कारण हम जैसे विकलांगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है यही कि पूरे प्रदेश में विकलांगों के लिए भी खेलकूद जैसी प्रतियोगिता आयोजित होना चाहिए।

मनीष सराटकर (दिव्यांग खिलाड़ी) मनीष का कहना है कि वह बचपन से ही क्रिकेट का शौकीन है और उसे क्रिकेट काफी पसंद है वह बचपन से ही क्रिकेट खेल रहा है ,लेकिन एक एक्सीडेंट के दौरान उसका पैर कट गया था । जिसके बाद वह क्रिकेट नहीं खेल पा रहा था । लेकिन क्रिकेट उसका सबसे मनपसंद खेल था उसे खेलने के लिए वह रोजाना बैसाखी के सहारे प्रैक्टिस करने लगा । बैसाखी के सहारे कई क्रिकेट टूर्नामेंट में मैन ऑफ द मैच और मेडल भी प्राप्त की है इतना ही नहीं उसे कई प्रमाण पत्र भी मिले हैं । मनीष का कहना है कि विकलांगों के लिए सरकार के द्वारा खेल कूद का महत्व नहीं दिया जा रहा है अगर हम जैसे विकलांग लोग खेलकूद मैं अपना हुनर दिखा सकते हैं|

 

Comment



ताज़ा उफ्फ

TWITTER FEED