राष्ट्रीय पर्व पर बिकती है,शराब? न मानो तो देखिए..


गणतंत्र दिवस। सुबह देश प्रेम वाले नारे लगे....दोपहर में स्वादिष्ट व्यंजन पके और शाम ढलते ढलते सारी देश भक्ति परे दुबक ली...और उफ्फ़..फिर कायदे कानूनों की पुंगी बनाकर भ्रष्टाचार के जेब मे डाल असल तंत्र सामने था।

जी...तस्वीर चौंकाती लेकिन भारत के सड़े तंत्र को भी दिखाएगी।

सही देख रहें हैं...मधुशाला ही है...दिन भी गणतंत्र दिवस का है।

चीखता नज़ारा कहता...जिससे जो बने सो कर लो..।

आलम यह कि...बस जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करो और मस्त छलकते जाम के साथ राष्ट्रीय पर्व का जश्न मनाओ।

मप्र के सागर जिले का देवरी है साहब..कायदे कानून की धज्जियां भी उड़ी,आम जन के दिल को ठेस भी लगी और माफिया की बुलंदी भी दिखी। हालांकि आबकारी कार्यालय है यहां । लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नदारद रहते हैं। बस आपसी सामंजस्य से कारोबार हवा में है। यहां तक कि राष्ट्रीय पर्व के सम्मान की परवाह नही । सही है...देश अपनी जगह और धंधा अपनी|

खैर,काला सच सामने है और कार्रवाई का इंतज़ार..।

अब तो जागो सरकार ..जागो

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