बाहर हल्ला और अंदर ता-ता थैया । पक्ष विपक्ष नेताओं के बीच उफ्फ़.. पकती खिचड़ी ?


सियासत में बहुत सम्भव है साहब...कि जो दोस्त नज़र आते हों, वो सच में ही अच्छे दोस्त हों?
 या विरोधी की भूमिका में खड़ा नेता..खांटी विरोधी।
समय,काल,स्थिति और  बेशक सियासी लाभ, वो हकीकत है जो पर्दे के पीछे बहुत कुछ करवाता है ।
  क्या ऐसी खिचड़ी ही मप्र में भी खदबदा रही है।
मप्र की सियासत के दो बड़े नाम .... मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ।
वो नेता...जिनके आसपास दोनो दलों की राजनीति घूमती हैं।
वो नेता जो अपने अपने चरम पर हैं।
वो नेता..जिनके सियासी भविष्य को लेकर खूब अटकलों का बाज़ार गर्म है।
वो नेता..जो अकेले ही अपना झंडा बुलंद करने का माद्दा रखते हैं ।
लेकिन जब अपने ही ..सियासी सल्तनत में सेंध लगाने लगे तो बेगानों के साथ पर्दे के पीछे गुटरगूँ करने में भी कोई हिचक नही।
 सत्ता से हटने के बाद कमलनाथ अपने आपको बनाए रखने के लिए जुटे हैं तो शिवराज ..मुख्यमंत्री की कुर्सी तो सम्हाल चुके हैं लेकिन सत्ता में चेहरा परिवर्तन की अटकलें चैन सरका देती होगी।
शायद यही एक गणित  जिसने...कमलनाथ और शिवराज के बीच विपक्षी से अधिक अंदरूनी दोस्ताना को पनपा दिया ।
गुज़रे एक साल से लेकर उपचुनाव के दौरान...कुछ ऐसा ही झलकता है ।
खंडवा में ओबीसी वोट बाहुल्य के बावजूद अचानक अरुण यादव का टिकट कटना । ज़ाहिर तौर पर बदले समीकरण के बाद भाजपा यहां राहत में हैं ।

अहसास हुआ होगा आपको,कांग्रेस अपना कुनबा छोड़ भाजपा के घर में ज्यादा झांकती नज़र आती है | ऐसा लगने लगा है कि फैसले कांग्रेस नेताओं के और अमलीजामा पहनाने क भाजपा  बेकरार|  
  अब देखिए , कमलनाथ अपनी सभाओं में डायरेक्टर, एक्टर जैसे बयान देते हैं | यहाँ तक कि सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री बदलने के तारीख़ तक बता देते हैं।
दूसरी ओर , दिग्गी बाबू एक ट्वीट कर जाते हैं और मुख्यमंत्री बदलने का शगूफा छोड़ते हुए तीन संभावित नाम भी खोल मारते हैं|
  अब भैया साफ़ है .... यदि वाकई में भाजपा कोई खेल करना चाहती थी तो अब गले में हड्डी फंस गई | बोले तो कोई भी ऐसा वैसा कदम उठाकर कांग्रेस के  दावों पर हामी की मुहर लगाने से तो रही | खिचड़ी के दांव ने सारे महत्वाकांक्षी नेताओं के अरमान ढीले तो  कर ही दिए, साथ ही अपनी रणनीति से आगे की सारी रणनीतियों की धज्जियाँ उड़ा मारी |

 उपचुनाव में आरोप प्रत्यारोप तो हैं लेकिन बड़े मुद्दे जैसे महंगाई,बेरोजगारी,किसान, सारे उडनछू। मानो इन मुद्दों को पोटली बनाकर खिचड़ी के लिए आग सुलगा ली गई |
 तो यहां शिवराज भी बीती कांग्रेस सरकार पर कई गंभीर आरोप जड़ते रहे लेकिन अब तेवर नरम दिखते हैं।
तो भैया  ... समझे | न यहाँ कुछ होने वाला है और न वहां  ... बोले तो हम साथ साथ हैं |