कांग्रेसी गए तो थे घेराव करने | उफ्फ...पानी से नहलाकर वापिस कर दिया |


 इसे कहतें हैं जिसकी लाठी उसकी भैंस  ... अब भैंस मैस छोडो  ... लाठी पकड़ो | 

अब देखो न  ... लाठी थी तो महाराजा साहब का दमदार कार्यक्रम इंदौर की धरती पर हो गया | न कोरोना गाइडलाइंस का चक्कर रहा और न कानून व्यवस्था का पचड़ा | सैकड़ों की तादाद में भाजपाई जमे और महाराजा साहब का इस्तकबाल बुलंद हुआ | 
 
 
 लाठी थी तो सब कुछ सम्भव हो गया | दूसरी तस्वीर भी इंदौर की है   ... बेचारे लाठी विहीन कांग्रेसी भी अपनी मांग लेकर उचक पड़े | फिर क्या था प्रशासन ने सारे कायदे कानून ज़िंदा कर मारे और बेचारे कांग्रेसियों को पानी से मार मार कर खदेड़ दिया | कुछ नहाकर भी न माने तो उन पर  खाकीधारियों ने लाठी कुदाने में भी संकोच नहीं किया | 
 वैसे देखा जाए तो कांग्रेस की मांग कुछ ख़ास नहीं थी |बस धार्मिक पर्वों को मनाने की अनुमति दिए जाने की मांग बुलंद करने पहुंचे थे | थोड़ा सियासी मांझा खींचना था तो तय किया गया था कि कलेक्टर कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा | 
सत्ता से बाहर वाले नेताओं की कौन सुनता है | इधर जोश में कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे  ..  उधर प्रशासन होश में लाने में जुट गया | जो हाल हुआ वो वीडियो में झांक लीजिए | 
 

हालांकि खदेड़े जाने से नाराज़ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार पर भड़क लिए | उठाया फोन  ... खोला ट्विटर  ... और ठोंक दिया बयान | कमल बाबू ने लिखा 
 ... हज़ारों कांग्रेसजन की निकली मौन पैदल रैली पर जमकर लाठीचार्ज , वाटर केनन का उपयोग , बर्बरता , दमन | 
 
 
 
 
         सही है भैया  ... सत्ता में हो तो नियम कायदे आपकी जेब में और विपक्ष में पड़े हो तो उफ्फ  .... ''सावधानी हटी - मार पड़ी''