थप्पड़ वाले बयान की गूंज,महाराष्ट्र की सियासत में लगी आग


 मोदी सरकार में मंत्री नारायण राणे के बयान से ऐसा धमाका हुआ कि मामला थाने के एफआईआर रजिस्टर तक जा पहुंचा | शिवसैनिकों ने धरना प्रदर्शन करके पूरे महाराष्ट्र को सर पर उठा लिया है तो भाजपा सहित केंद्रीय मंत्री राणे के सुर भी तीखे हैं | 

 
केंद्रीय मंत्री पर FIR 
 
केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के विवादास्पद बयान के बाद महाराष्ट्र की सियासत का पारा एकदम ऊपर चढ़ गया | हंगामे के साथ शिव सैनिकों ने मुख्यमंत्री का अपमान करार देते हुए कानून की शरण भी ली है | 
नाशिक के पुलिस कमिश्नर दीपक पांडे कहना है  कि शिव सेना नाशिक के प्रमुख ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बयान पर शिकायत दर्ज कराई थी और कहा था कि इसने उन्हें धक्का पहुँचाया है और इससे क़ानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है.
पुलिस कमिश्नर पांडे के अनुसार ‘नाशिक साइबर पुलिस स्टेशन में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है.यह एक गंभीर मामला है और केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए एक टीम को भेजा गया है. वह जिस भी जगह पर होंगे, उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. हम कोर्ट के फैसले का पालन करेंगे.’| 
 
 साभार - ANI 
 
केंद्रीय मंत्री की सफाई 
 
केंद्रीय मंत्री ने भी सफाई  दी है | राणे के अनुसार 'एफ़आईआर की जानकारी मुझे नहीं है. मैं एक सामान्य आदमी हूँ. मैंने कोई जुर्म नहीं किया है. क्या यह जुर्म नहीं है कि कोई 15 अगस्त के बारे में नहीं जानता है? मैंने कहा था कि मैं थप्पड़ मारता. ये शब्द थे और यह कोई अपराध नहीं है” | 
 नारायण राणे के तेवर साफ़ करते हैं कि वह भी इस मामले को लेकर शांत बैठने के मूड में नहीं हैं | 
 
साभार - ANI 
 
क्या है विवाद,जो तूल पकड़ गया 
 
 
साभार - ANI 
 
दरअसल मामले की शुरुआत 23 अगस्त सोमवार को हुई जहाँ रायगढ़ ज़िले में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान राणे ने कहा था कि यह शर्मनाक है कि एक मुख्यमंत्री को देश की स्वतंत्रता का साल नहीं मालूम है | राणे ने कहा था कि मुख्यमंत्री अपने भाषण के दौरान स्वतंत्रता का साल पूछने के लिए वापस मुड़े थे | 
“मैं अगर वहां पर होता तो मैं (उन्हें) कस कर थप्पड़ मारता” | 
 
फिलहाल मामला ठंडा पड़ने के आसार दिखाई नहीं दे रहें हैं | ज़ाहिर है हाथ आए मौके को मुख्यमंत्री का अपमान करार देकर शिवसेना एक ठोस रणनीति के तहत भाजपा को घेरने में जुट गई है तो वही राणे इस मामले को देश अपमान का मुद्दा बना कर कदम पीछे खींचने के पक्ष में कतई नहीं है | ज़ाहिर है आने वाले समय में शिवसेना - भाजपा का आपसी द्वन्द सियासी तूफान की रफ़्तार और तेज करेगा |