चुनाव परिणाम तय करेंगे शिव-नाथ का सियासी भविष्य ! किसकी बजती रहेगी तूती और किसका बजेगा बैंड ? देखिए


चंद दिन ..फिर साफ हो जाएगा कि शिव बाबू के नगाडे की आवाज गूंजती रहेगी या फिर कमल बाबू की तूती।
 बात सिर्फ पार्टी जीत की नही...बल्कि चेहरों की है।
      देखिए न एकदम सीईओ अंदाज में काम करने वाले कमल बाबू आज गांव-गांव तक की धूल फांक रहें हैं तो वहाँ शिव बाबू रात गुजारने के साथ चौपाल लगाए पड़े हैं।
एक दम टकाटक बात है साहब ।
    4 उपचुनाव ...। जीत की पीपडी जिस भी दल में बजे..उसका कोई खास फर्क नही पड़ने वाला लेकिन उफ्फ़...दोनो दलों के सिरमौर, बोले तो नेतृत्व का सियासी भविष्य निशाने पर ज़रूर होगा।  

   सत्ता हासिल करके फिर सड़क पर आने वाली मप्र कांग्रेस के मुखिया, कमल बाबू। आस का दामन पकड़े टिके हैं। हालांकि युवा नेताओं से लेकर अन्य खेमा, बाबूजी की विदाई करवाने को लेकर आलाकमान के आंगन में कई बार मटक चुका है। अब  यदि चुनाव के नतीजे हाथ से निकले तो फिर विरोधी खुलकर मैदान में आने से कोई परहेज नही करेंगे तो आलाकमान गंभीर हो सकता है।
  वैसे दमोह उपचुनाव की जीत से कमल खेमा ज्यादा ही उत्साहित है।

भाजपा के आंगन का भी कुछ ऐसा ही हाल है । बीते कई महीनों से सत्ता के चेहरे में बदलाव के कयास हर दूसरे दिन टपक पड़ते हैं। मौके के तलाश में कई चेहरे हैं लेकिन फिलहाल तो शिव के आगे सभी औंधे से पड़े हैं।
   अब भैया साफ है कि..दमोह के बाद यदि उपचुनावों के परिणाम भी दगा दे गए तो ...उफ्फ़ शिव बाबू की आगे की राह आसान तो कतई न होगी।
   ज़ाहिर है..2023 में सत्ता का सपना पाले भाजपा हाईकमान बड़ा फैसला लेने में कोई चूक नही करेगा।

  वैसे खंडवा भाजपा का गढ़ है। बचाना शिव बाबू के लिए बहुत ज़रूरी है। हालांकि ओबीसी उम्मीदवार अरुण यादव को गच्चा देकर बहुत हद तक कांग्रेस ने भाजपा की मदद कर दी है। पृथ्वीपुर में कांग्रेस फिर से अपना परचम ठोंक सकती है तो रैगांव और जोबट में मुकाबला एक दम जबर है।
  अब भटकते सूत्रों की माने तो     भाजपा ज़ोर मार सकती है।
 

तो कुल जमा दो बड़े चेहरों का भविष्य, तीर के निशाने पर है।
जिसके पक्ष में परिणाम कूंदे.. कोई शक नही की बहुत मजबूत स्थिति में डंका ठोकेगा और जिसकी साथ परिणामों ने की बेमानी ..उफ्फ़ उसके आंगन से अच्छे दिन की भैंस खुलना तय ही समझिए।