शुक्र का शुक्रवार,बदनामी में भी रास्ते हज़ार


 शुक्र का शुक्रवार,बदनामी में भी रास्ते हज़ार

पढ़िए उफ्फ का खास तड़ाका 

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- आशीष चौबे
 
    गुरूवार को देश के सबसे महत्वपूर्ण विषय पर फैसले के बाद शुक्र का शुक्रवार आ ही गया| राष्ट्र पुत्र जनाब आर्यन खान साहब दौलत की बग्घी पर सवार होकर अपनी दुनिया में लौट चले|
 
    दिवाली भले ही तनिक दूर हो लेकिन मन्नत में मन्नत पूरी होने के चलते जलसा मना| वहां जश्न था तो यहाँ मीडिया के न्यूज रूम डगमगाने लगे। अच्छा ख़ासा राष्ट्रीय मुद्दे पर घंटे कट रहे थे | टीआरपी पक रही थी| अख़बार बिक रहे थे | वेबसाइट पर हिट्स कूंद रहे थे | अब फिर मोदी बाबू की विदेश यात्रा पर ज्ञान बांटों या फिर पकिस्तान,चीन की शरण में जाओ|
 
     चिंता, भक्त और चमचों के दिमाग में भी कुलांचे मार रही है| मस्त मस्त कंटेंट पक रहा था | सोशल मीडिया पर सैकड़ों घंटे कब उचक गए पता ही न चला|
यहाँ आर्यन बाबू भी जबर मूड में होंगे| जेल की यात्रा करनी पड़ी लेकिन चलो पापा खान के नाम से हटकर,उनके नाम को भी पहचान मिली| वर्ना लोग तो अब तक शाहरुख़ का बेटा ही पुकारते थे|
 
 
       
वैसे रंगरंगीली दुनिया में शराब डकारना,चिलम चढ़ाना ,ड्रग्स लेना,कोई नशाखोरी में शामिल नहीं होता बल्कि यह तो हाईस्टेंटर्ड लाइफ स्टाइल का एक प्रतीक बोले तो Sign है|
  अब भला कृषि प्रधान देश के लोग क्या जाने! संस्कार,परिवार,मूल्य यह तो निचले तबके या फिर ज्ञान देने के लिए काफी हैं| आधुनिक सोच तो जिंदगी को डिंगडांग करने में भरोसा करती है|
 
        पापा खान भी खुश हैं| खुद भटकते करियर को सम्हालने के साथ बेटे को लांचिंग करने का बेहतरीन मौक़ा भी मिल गया| केस हैं जो आज नहीं तो कल निपट ही जाएगा| खन खन की आवाज पर ठुमकते महंगे वकील जोड़ तोड़ से सब ठीक कर लेंगे | लेकिन नफा अधिक हुआ? कई सालों से रुपहले पर्दे पर गायब पापा खान एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं| कोई गरिया रहा है तो कोई लाड़िया रहा है| पापा खान को पूरी आशा होगी कि सुर्ख़ियों पर सवार होकर आने वाली फिल्म 'पठान' को मुकाम मिल जाएगा तो लख़्ते जिगर को एक दो फिल्म|  देखिए संजू बाबा के करियर को भी उनसे जुड़े  विवादों ने कितना सम्हाला|
   
    पापा खान के साथ कारण बाबू,कश्यप साहब,विधु विनोद चौपड़ा साहब,हिरानी बाबू जैसे ढेरों निर्माता निर्देशकों को बैठे बिठाए फिल्म बनाने का Plot  मिल गया| कुछ सहानुभूति दिखाकर फिल्म चमका देंगे तो ढेरों दर्शक सिर्फ चर्चाओं के घेरे में आकर|
     कुल जमा अब मान सम्मान जैसा मामला तो होता नहीं | हाँ .. बस चंद मस्ती के कश  में गाँठ से लाखों का चंदा लग गया| लेकिन LimeLight  में तो ला ही दिया| जो बाप बेटे के लिए सबसे ज़रूरी थी| मीडिया,सोशल मीडिया धुरंधरों को कुछ वक्त की ख़ुराक भी मिल गयी|
    टीव्ही पर दौड़ता एक विज्ञापन आपकी नज़रों के सामने से ज़रूर गुज़रा होगा| 'दाग अच्छे हैं' ..  तो अब आप भी मान ही लीजिए!
   ख़ैर, इस राष्ट्रीय मुद्दे को कुछ दिन की राहत मिली| लेकिन भैया .. आगे क्या? तो चलिए दीवाली की खुशियों में शुमार पटाखों और दीपों की और बढ़ते हैं|
तो शुरू हो जाओ ...  कही यह मुद्दा हाथ से निकल न जाए ?