केंद्र ने कहा, हाँ तो देश के पहले समलैंगिक जज होंगे कृपाल बाबू


गे,लेस्बियन बोले तो समलैगिंक | कभी यह शब्द सुनकर ही लोग बगलें झाकने लगते थे लेकिन अब मसला आम है | 

लोग इस सब्जेक्ट पर न सिर्फ बात करने लगे हैं बल्कि समलैंगिक को अजीबो गरीब नज़रो से देखते भी नहीं | 

समलैंगिक भी ठोंककर मानने लगे हैं कि 'बेबी को बेस पसंद है'

खुलते माहौळ के साथ एक खबर और खास है | खबर कोर्ट कचहरी से है | 

अरे न भैया,  किसी समलैंगिक के मसले को लेकर कोई नया बवाल नहीं है बल्कि चर्चा समलैंगिक जज साहब के नियुक्ति को लेकर है | 

जी .. अधिवक्ता सौरभ कृपाल देश के पहले समलैंगिक जज बन सकते हैं | प्रधान न्यायाधीश एनवी रमन की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने इस नाम के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है | 

पहले भी नाम प्रस्तावित किया गया लेकिन ...

 सौरभ के समलैंगिक स्वीकारता के चलते नियुक्ति सालों से अटक रही है | साल  2017 में तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अगुआई  में दिल्ली उच्च न्यायालय के कॉलेजियम की ओर से पदोन्नत करने की सिफारिश की गई थी। लेकिन मामला केंद्र में जाकर उलझ गया | 

एक बार फिर यह नाम केंद्र के सामने है | लेकिन इस बार बहुत संभावना है कि कृपाल अपना असल मुकाम हासिल कर सकते हैं | 

विदेश से पढ़े हैं सौरभ बाबू 

दिल्‍ली के सेंट स्‍टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद सौरभ कृपाल ने ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की। उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से ही पोस्‍टग्रेजुएट (लॉ) किया है। सौरभ कृपाल लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते रहे। वे यूनाइटेड नेशंस के साथ जुड़कर जेनेवा में भी काम कर चुके हैं। नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ’ जैसे चर्चित केस लड़ने के कारण उनका नाम सुर्खियों में रहा। वे धारा 377 हटाये जाने को लेकर दायर याचिका का केस लड़ चुके हैं। इसके बाद सितंबर 2018 में धारा 377 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पुराना कानून रद्द कर दिया था।

और जानिए, सौरभ बाबू के बारें में 
सौरभ कृपाल, जस्टिस बीएन कृपाल के बेटे हैं, जो  सुप्रीम कोर्ट के 31 वें मुख्य न्यायाधीश रहे। सौरभ कृपाल को लॉ प्रैक्टिस के क्षेत्र में दो दशक पुराना अनुभव रहा है। वे सिविल, वाणिज्यिक और संवैधानिक मामलों के खासे जानकार हैं। सौरभ कृपाल LGBT समाज के प्रति अपनी खुलकर राय रखते आ रहे हैं।