क्या कांग्रेस का छत्तीसगढ़ में भी फैलने वाला है रायता ? मुख्यमंत्री बदलाव की चर्चाओं का आया तूफान


सत्ता का चेहरा बदलने की ख़बरें मध्यप्रदेश के हवाओं में खूब थी | समय के साथ  मध्यप्रदेश में तो कयासों ने थोड़ी सांस ली है लेकिन पडोसी राज्य छत्तीसगढ़ में ज़रूर सियासी तूफान  के संकेत हैं | राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री बदलाव के चर्चा काफी तेज हो चली है | 
 
 
अटकलों का बाजार क्यों है गर्म ? 
 
 
राहुल गाँधी के साथ कांग्रेस नेताओं की बैठक से चर्चाओं को और मिली हवा 
 
 मुख्यमंत्री पद के दावेदार टीएस सिंहदेव के साथ मंगलवार को राज्य कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं की दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाक़ात की ख़बर के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और तेज़  है | सियासी सूत्रों की माने तो छत्तीगढ़ में कांग्रेस की स्पष्ट जीत के बाद ढाई-ढाई साल का कथित फ़ॉर्मूला तय हुआ | मुख्यमंत्री बनने का पहला मौक़ा भूपेश बघेल को मिला था | और यदि ऐसा कोई फार्मूला था तो अब तय वक्त बीत जाने के बाद दूसरे सशक्त उम्मीदवार टी.एस.सिंहदेव को मुख्यमंत्री की कुर्सी की दिए जाने की बारी है | 
 
 
 
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अटकलों के बीच दिल्ली में कांग्रेस नेताओं की बैठक ने सियासी पारा और ऊपर चढ़ा दिया है |  बैठक के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विभिन्न योजनाओं के बारे में राहुल गांधी से विस्तार से चर्चा हुई |  वहीं टीएस सिंहदेव ने कहा कि राहुल गांधी के साथ कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई |  लेकिन इन नेताओं की सक्रियता और प्रदेश कांग्रेस में बन रहे समीकरणों से बहुत कुछ होने के संकेत और पुष्ट होते हैं | 
 
कुर्सी का ढाई ढाई साल वाला फार्मूला ?
 
 
दरअसल साल 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भाजपा सरकार की चूलें हिलाते हुए अपनी सरकार स्थापित करने में बड़ी सफलता हासिल की | मुख्यमंत्री का नाम तय करने के दौरान टी.एस.सिंहदेव ''बाबा'' का नाम सबसे ऊपर था | ताम्रध्वज साहू का नाम भी काफी उछला लेकिन सारे समीकरणों को धता बताते हुए भूपेश बघेल कुर्सी हासिल करने में सफल रहे | तब यह बात सामने आई कि आलाकमान ने स्थिति को भांपते हुए ढाई ढाई साल मुख्यमंत्री बनाए जाने का फार्मूला तय किया था | अब यदि यह फार्मूला था तो मुख्यमंत्री की कुर्सी सम्हालने की बारी सिंहदेव की है | 
माना जा रहा है कि सिंहदेव अपना हक़ चाहते हैं और बाकायदा मोर्चा भी खोल दिया है | वही बघेल हाथ आई सत्ता को खोने के लिए कतई भी तैयार नहीं हैं | ऐसे में ज़ाहिर है कि पार्टी के अंदरखाने घमासान मचना तय है | 
 
 
   दोनों ही नेता मौके को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं ऐसे में यह मसला न सिर्फ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए बल्कि आलाकमान के लिए भी गले की हड्डी बन चला है | 
कांग्रेस का बढ़ा सिर दर्द 
 कांग्रेस के सामने जटिल स्थिति है |   राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने के बाद से ही कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर सवाल उठते रहे हैं |  आपसी उठापटक के  चलते मध्यप्रदेश में तो कांग्रेस पार्टी को सत्ता से ही हाथ धोना पड़ा, वहीं राजस्थान और पंजाब के झगड़े आजकल रोज़ सुर्ख़ियों में हैं |  
खैर नेताओं के बयान जो भी हों लेकिन हाव भाव और बढ़ती सक्रियता बहुत साफ़ करती है | अब जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती है तब तक सत्ता  में बदलाव की अटकलें थमने का नाम नहीं लेने वाली |