बस दो तस्वीर और उफ्फ़..खुल गई छिंदवाड़ा माँडल के ढोल की पोल । जान जोखिम में डाल वैक्सीनेशन करने पर मजबूर हुए सरकारी कर्मचारी


छिंदवाड़ा विकास माँडल ..कांग्रेस का एक मात्र वो ढोल है जिसे अक्सर पीटा जाता है  । लेकिन चंद तस्वीर ने कूंदफांद करके ढोल फाड़कर पोल खोल दी ।
 विकास माँडल  के दावों में छुपे उफनते नाले ने ऐसा रास्ता रोका कि उफ्फ़..सौ फीसदी वैक्सीनेशन देने का लक्ष्य थोड़ी देर तो हिलता सा लगा ।
लेकिन वैक्सीनेशन का निश्चय दृढ़ था और कर्मचारियों का मजबूत हौसला ।
खतरे को ठेंगा दिखाते हुए आखिरकार लक्ष्य भेदने में सफलता हासिल कर ही लिया गया ।
दिमाग में चींटी काट गई होगी । जी एकदम सई.. कमल बाबू का छिंदवाड़ा माँडल ।
पहली तस्वीर पर नज़र फेंकिए । जो पातालकोट से आ टपकी । दौरिया पाठा में रहने वाले लगभग 12 भारिया परिवारों को वैक्सीन लगना था । स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने कैसे रास्ता तय किया । खुद ही देख लीजिए ।
जान जोखिम में डालकर दुर्गम पहाड़ी पर बने पत्थरों को थामकर गांव तक पहुंचना पड़ा ।
अब दूसरी तस्वीर भी तो देखिए ..जो PHC पिंडरईकला के ग्राम सांख की है । उफनते नाला था और स्वास्थ्य विभाग की टीम को इसे पार करनें के अलावा कोई चारा भी नही । फ़र्ज़ के आगे जिंदगी को परे रखा और बढ़ा दिए मंज़िल की ओर कदम ।
सलाम ऐसे कर्मठ कमर्चारियों को जिन्होंने खौफ को फ़र्ज़ के आगे बौना कर दिया । साथ ही छिंदवाड़ा माँडल भी सच के तूफान में उफ्फ़..ताश के पत्तो की तरह एक झटके में धूल फांक गया