कमल पर कमल भारी। या फिर कमल की बढ़ती बेकरारी


मप्र में उपचुनाव की उठापटक जबर हैं । 
कंपकपातें हाथों में आरोपो की तलवार थामे कमल बाबू भी...चुनावी मैदान में कूंद पड़े हैं । 
इधर शिव बाबू भी अपने पुराने तेवर के साथ पार्टी के पक्ष में जीत का आंकड़ा बढ़ाने के लिए बेकरार । 
वैसे यह चुनावी जंग आसान नही है । 
 मौका न चूकते हुए सत्ता पक्ष ने अपनी उपलब्धियों को ढाल बनाकर विपक्ष की कमज़ोरी पर वार करना शुरू कर दिया है ।
युवाओं को साधते शिव बाबू ने संबल योजना बंद करने का मुद्दा उठाकर कांग्रेस के पेशानी पर सवाल पोत मारे । 
सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि गरीबों की सरकार वाले दावे को फिर से ठोंकते हुए शिवराज ने अपनी प्राथमिकता को भी गिनवा डाला ।
     खैर मतदाता भी तैयार हैं । सियासी दावों,वादों और आरोपों को बेहतर जानते हैं..समझते हैं । ऐसे में वोट की दिशा किस ओर मुड़ती है..गुरु, देखना बेहद दिलचस्प होगा । 
(मामला समझने के लिए वीडियो को भी देख लें,बेहतर होगा)
और हां आने वाले परिणाम..पक्ष हो या विपक्ष, दोनो ही सियासी दलों की आगे की दशा और दिशा को बहुत हद तक प्रभावित करेंगे |