करोड़ो का अस्पताल । व्यवस्था बदहाल


 सरकारी अस्पताल है साहब... यहां सब बराबर है । इंसान हो या जानवर कोई भेदभाव नही । ऐसी मिसाल शायद ही देखने को मिले । जमीन पड़े मरीज और चंद कदमों पर हक के साथ जमा कुत्ता । यह अद्भुत नजारा मप्र के नक्शे से ही झांक सकता है । जब झांक ही रहे हैं तो पूरा झांक लीजिए । तबियत मस्त हो जाएगी । यह भन्नाटेदार नज़ारा छतरपुर में खड़ी करोड़ो की लागत से बनी सरकारी इमारत का है। पूरे तीन सौ बेड की क्षमता रखता है । जिला अस्पताल भी इसी इमारत से संचालित होता है । इमारत तो मस्त खड़ी कर दी लेकिन व्यवस्था ..उफ्फ़ । मरीज पहुंचते हैं बेहतर इलाज की आशा से । लेकिन चौपट व्यवस्था हर आस को इसी अस्पताल के डस्टबीन में फेंक मारती है । तीन सौ बिस्तर लेकिन मर्रीजो की किस्मत में फर्श है । लोग परेशान हैं लेकिन सुने कौन जब सीएमएचओ साहब से सवाल किया गया तो प्रतिक्रिया देखिए ...जैसे यह सब आम हो । सच सामने स है लेकिन गुरु बैठे है...लिपाई करने । अब किसको और क्या कहा जाए । कुएँ में तो भांग घुली है । सरकार दावे ठोंकने में व्यस्त और जिम्मेदार अधिकारी मलाई पेलने में मस्त...और बेचारे आम लोग उफ्फ़..तंत्र से पस्त