मोदी बाबू ने विकास का दावा ठोंका । उफ्फ़..सीधा बच्चों के मासूम दिल पर जाकर सटाक से लगा


 बोलने का भी एक शौक होता है...

और जब लाल किले की प्राचीर हो तो उत्साह छलांगे मारने लगता है । जो बोलो,जैसा बोलो बस बोलो...।

 बड़ी बड़ी बातें हो...बड़े बड़े दावे हों ...बस फेंक मारो । 
उन्ही दावों में से एक दावा उछलकर सीधा इन नन्हे मुन्नों को आकर सटाक से लगा । 
बच्चों को समझ ही नही आया कि अनदेखी कौन सी मार पड़ी है ...जब दिमागी बत्ती को रोशन  किया तो भेजे में घुसा कि,यह तो विकास के दावे का गहरा घाव है । 
मासूम तो विकास का मतलब भी नही जानते ..इनको छोड़िए,इनके बाप दादा भी इस भारी शब्द से अंजान है । 
यह मासूम रोज स्कूल जाने के लिए भरे पानी में से होकर गुजरते हैं । 
सड़क तो छोड़िए ...विकास के नाम पर पानी निकलने के लिए नाली तक न बन पाई । 
अब देखिए आज़ादी के दिन बच्चों के हाथ में लड्डू तो हैं लेकिन मुलभूत सुविधा न मिलने की उदासी चेहरे पर बिखरी पड़ी है  | 
 
 
https://www.uffyeh.com/news/Modi-babu-made-the-claim-of-development-Uff-went-straight-to-the-innocent-heart-of-the-children
 
लेकिन बाबू जी ने तो लाल किले से दावा फेंक मारा । सबका साथ सबका विकास के मंत्र से गांव में आधुनिकता धूम मचा रही है । 
 पधारिये साहब कभी इधर ..दीदे फाड़े अमाव गांव के लोग आपका इंतज़ार कर रहें हैं । आपने तो क्या प्रदेश के नेताओं ने भी इस गांव का नाम न सुना होगा । बता देते है । मप्र के रीवा जिले की त्योंथर तहसील में देखिएगा । विकास के गम से पीड़ित यह गांव मिल ही जाएगा । 
खैर बड़े साहब को क्या कहें उफ्फ़...यहां तो जिले के अफ़सरों ने तक न सुनी । 
 अब ठीक भी तो है..विकास भाषणों की शोभा बढाने का शब्द है..वो किया जा रहा है । 
बाकी रही आप लोगों की बात तो कोई नही...आपकी गुज़र गई...अगली पीढ़ी की भी उफ्फ़...गुज़र ही जाएगी