सूत न कपास और जुलाहों में लठ्ठमलठ्ठा । नही समझे तो सुनिए यह Podcast


अति महत्वाकांक्षा और सत्ता हासिल करने की छटपटाहट जो न करवाए वो कम है साहब ।
कुछ नही तो सुरसुरी छोड़ते रहो । अफवाहों का बाज़ार गर्म करके ही खुश हो लो ।
कुछ ऐसा ही हाल है.. मध्यप्रदेश की सियासत में ...।
सत्ता बदलाव की खबरों को ऐसा छोंक लगाया जाता है कि बस यह हुआ और अब हुआ ?
बोले तो सूत न कपास और जुलाहों में लट्ठमलठ्ठा...
लेकिन गुरु अफवाहों के परों में जान कहाँ होती है । बस चंद घण्टे में फडफडा का धूल फांकने लगती है ।
यहाँ दिलजले अपने में जुटे हैं ...वहां शिव बाबू और तेजी से अपनी झोली में उपलब्धियों को जमा करने में व्यस्त हैं ।
18 सितंबर ...जब हर वो फुसफुसाहट फुस्स हो गई ..जो कहा जाता था कि अमित बाबू और शिव बाबू के संबंधों में खराश है ।
जमाने ने देखा शिवराज के बुलावे पर अमित शाह आए भी ..और सार्वजनिक मंच से काम काज की जमकर तारीफ करते हुए...विरोधियों के अरमान भी ठंडे कर मारे ।
 
अब यह तस्वीर भी देखिए ...हर कयासों को ठक से विराम लगाने के लिए काफी है ।
चलिए यह तो ठीक.. शिव बाबू की पीएम मोदी की मुलाकात से स्थिति और स्पष्ट हो गई । मोदी ने मप्र विकास के लिए बनाए गए खाके पर अपनी सहमति की मुहर ठोंकी ।
सिर्फ इतना ही नही बल्कि शिव बाबू ने नए नवेले हबीबगंज स्टेशन के उदघाटन के लिए  आमंत्रित किया ..उसे भी मोदी जी ने तुरंत स्वीकार लिया ।

अफवाहों,चर्चाओं के परे शिवराज अपने अंदाज में काम में जुटे हैं । दौरे जारी हैं और विकास योजनाओं पर फोकस भी ।
वैसे यह स्थिति नई नही है..। असलियत तो यही है साहब कि आम मतदाताओं की सेवा और पार्टी के भरोसा को थामे शिवराज की स्वर्णिम मध्यप्रदेश गढ़ने की ओर यात्रा सतत जारी है