सियासत का खुफिया गठबंधन । उफ्फ़, विपक्षी नेताओं की मेहरबानी से बचती कुर्सी


बदलाव की अटकलों के बीच कुर्सीधारियों ने बचाव का एक नया पैंतरा खोज निकाला है, जो भगवान कसम, बड़ा मुफीद है। 
  मध्यप्रदेश,गोवा,छत्तीसगढ़,राजस्थान जैसे कई और राज्य हैं,जहाँ हर दूसरे तीसरे दिन बदलाव की खबर कूंदने लगती है।

  शिव बाबू तो अपनी नयी पारी के साथ ही जाने की भी खबर चिपका लाए।
कभी कोरोना लॉकडाउन के साथ तो कभी उपचुनाव के बाद।
 कयासों से शिव बाबू की तो नींद तो उड़ना लाज़मी है वहीं पूरा तंत्र भी उहापोह की स्थिति में।

    सुना है गुरु कि, विरोधी वो मदद कर जाते हैं जो अपनों के बूते से बाहर होता है|
  बस यही गुरु मंत्र बना और मानो समस्या का समाधान हो गया।

बात मध्यप्रदेश की| गिरते पड़ते समीकरणों के बीच शिव बाबू ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी तो सम्हाल ली|  लेकिन चेहरे बदलाव के कयास लगातार सनसनाते रहे|

अचानक कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह मानो शिव के गण बनकर उभरे। एक ट्वीट करके सभी को चौंका दिया| दिग्विजय ने न सिर्फ शिवराज के हटाए जाने का दावा किया बल्कि पद के तीन दावेदारों के नाम की एक सूची भी ज़ाहिर कर दी|
  इतना होता तो भी ठीक था| बची खुची कमी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक चुनावी सभा में मुख्यमंत्री बदलने की तारीख़ का खुलासा करके कर दिया|
  अब फंस गया मामला। भैया वाकई मोशा किसी बदलाव के मूड में थे, तो गयी भैंस पानी में। अब हाथ पैर फेंके तो कांग्रेस के दावों पर ठाकाठक वाली मुहर चस्पा होगी।

  अब ज़रा गोआ आ जाइये। खबर है कि मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को भी हटाने की सुरसुरी तेज़ होने लगी है। अचानक दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष बाबू ने बयान देकर दावा ठोंक दिया कि,भाजपा फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपना मुख्यमंत्री बदल देगी|
 लो अब कल्लो अपना खेल। आप ने तो अपना दांव चला और बल्ले बल्ले सावंत बाबू की हो गई। अब ठीक चुनाव से पहले बदलाव किया तो आप को सियासी लाभ तय है। चलो अब ,सावंत बाबू ने राहत की साँस ली होगी|
  राजस्थान का भी रायता है। अशोक गहलोत को हटाकर नया मुख्यमंत्री बनाए जाने वाली खबरों को खूब उछाला है| भाजपा इसमें सबसे आगे।
अब गुरु भाजपा की तरह कांग्रेस भी यहां उलझकर रह गयी है।

 बयानबाजी के बीच सियासत का नया पैंतरा फिलहाल तो कारगर होता दिख रहा है|
  कुर्सीधारियों के लिए ठीक है । अब उफ्फ़..कहाँ अपनी पार्टी के निचले नेताओं से लेकर आलाकमान तक झेलते रहो | सिर्फ विपक्ष के एक नेता के साथ गलबहियां करो और चैन से राज करते हुए सत्ता की मलाई चट करते रहो।