शर्मा जी ने चेताया । उफ्फ़..बेशर्म व्यवस्था ने ठेंगा दिखाया


वो कह गए.. उन्होंने सुन लिया..
और हालात थे जो आंख भींचे रहे
जी साहब..चेतावनी,समझाइश की औपचरिकता से परे..उफ्फ़..व्यवस्था..व्यथा में तब्दील होती रही ।

एक जिला,दो स्थान और तीन अलग अलग तस्वीर..।
पोल खोल देती हैं कि खोखले दावों,वादों के पीछे का सच दर्दनाक हैं ।
कानून व्यवस्था हो या फिर स्वास्थ्य सेवा..गुरु लंका लगी पड़ी है ।

जिला अस्पताल की पहली तस्वीर...
झांकिए ज़रा...
प्रसव पीड़ा होने पर 108 को फोन किया गया । सुनवाई थी, जो न हुई..। हालात देखते हुए टैक्सी से महिला को अस्पताल लाया गया लेकिन गेट पर ही महिला का प्रसव हो गया ।

दूसरी तस्वीर..पति के पैरों में चोट थी । वार्ड में ले जाने के लिए कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद ही न था । हालात समझ..पति को स्ट्रेचर पर लिटाकर ले जाने के लिए महिला मज़बूर हो गई । संतुलन बिगड़ा तो पति स्ट्रेचर से नीचे आ गिरा ।
अब कानून व्यवस्था का हाल भी देख लीजिए ..क्योंकि यहां कानून नही रसूखों का राज चलता है । पीड़ित ने आरोपियों को गाली गलौज करने से मना किया था...परिणाम.. उफ्फ़ ।

https://youtu.be/Pj7Ciw6YgTI

जाग जाओ मोहन प्यारों...
जाग जाओ..।इससे पहले कि आम जनता में आक्रोश जागे ..। और यदि ऐसा हुआ तो फिर हाथ में सत्ता नही... उफ्फ़...मंजीरे होंगे