बदले बदले से सरकार नज़र आते हैं। लेकिन, गुरु ऐसा क्यों? तो देख लिया जाए


शिव बाबू को कई अंदाज में देखा होगा। कभी नाचते गाते तो कभी लोगों के बीच सरलता से मिलते जुलते। कभी बहनों के भाई तो कभी  मामा के रूप में रूप में।
लेकिन इस उपचुनाव प्रचार के अंतिम दिन शिव बाबू का अलहदा अंदाज दिखा।
बोले तो एकदम एंग्रीयंगमेन ..।
शब्दों में चुनौती थी तो आवाज में उबलता आत्मविश्वास।
विपक्ष को ललकारा तो वादों की गारंटी जैसा बयान देकर..अपनो को भी संदेश पटक दिया कि..."भैया अपन टिके रहेंगे"
शिव के शब्दों में कटाक्ष तो रहता है लेकिन तीखापन नही! अब लगता है कि अंदर की कसमसाहट ने शब्दों पर कब्जा कर लिया।
उपचुनाव के परिणामों से सत्ताधारी दल की सेहत पर फिलहाल तो कोई असर नही होने वाला । जीते तो आगे की राह थोड़ी आसान होगी और हारे तो भविष्य में काफी मशक्कर करनी पड़ेगी।
बदलाव के बादल तो अभी भी उमड़ घुमड़ पड़ते हैं। लेकिन शिव के शब्दों और तेवर ने साफ कर दिया कि श्यामला हिल्स की ताजी हवा उफ्फ़..अभी क़िस्मत में रहना बाकी है।