चर्चा है..। इंदौरी भिया की तकदीर ज़ोर मार रही है या फिर..उफ्फ़


 कैलाश  बाबू ने बीते दिनों भुट्टा पार्टी करके अपने मकसद को भी खूब सेंका | दोस्ती का राग छेड़ा तो चलते चलते सियासी नब्ज भी टटोल मारी | इंदौरी भिया की मेल मुलाकात,हाव भाव ,अफसरों का अटेंशन  ...बुदबुदा रहा है कि कोई गुणा भाग तो है | हालाँकि नरसिंहपुर अपनी चौसर बिछाने में व्यस्त हैं | 

जय वीरू बनकर शोले का गाना गूंजा तो फिल्म की कहानी सरसरा गई | याद हैं न जय ने वीरू के लिए अपनी जान दे दी थी | भभकते दीयों का कहना है कि....  क्या एक दोस्त अब दूसरे दोस्त के लिए  .... ? हालाँकि वो फिल्म थी और यह सियासत जहाँ दोस्ती तो छोड़िए खून के रिश्तों का भी मोल नहीं नहीं | 
      वैसे इंदौरी भिया  ... मोशा के करीब भी हैं और सत्ता की गोटी घुमाने में माहिर भी | अक्सर साबित भी किया | पश्चिम बंगाल में खम ठोंककर अपनी दावेदारी और भी दुरुस्त की | दौड़ती भागती हवाओं की माने तो इंदौरी भिया  को एक बड़ा विकल्प माना गया | केंद्र में मंत्री न बना संकेत दिया है कि  ... रुको कुछ और बड़ा करो | भिया के पास वर्तमान में कोई और बड़ी जिम्मेदारी न थी लेकिन फिर भी आलाकमान के फैसले से चेहरे पर शिकन नहीं दिखी | हालांकि कहा जाता है की राजनीति में दिल में कितने भी छाले हों,होंठों पर मुस्कान और आँखों में विश्वास चमकाते रहना मज़बूरी भी होता है | 
          पार्टी के दिलजले नेता भी अंदर ही अंदर कूद फांद करने में व्यस्त हैं | अरे हाँ  ... मोशा बोले तो मोदी शाह | 
कैलाश उज्जैन पहुंचे | कायदों को जिस तरह से ताक पर रखा गया...उफ्फ  |  महाकाल मंदिर में प्रशासन का यूँ लमलेट होना भी  ..कहता है कि रोको मत, जाने दो | कहते हैं कि लालफीताशाही समीकरणों को भांपने में काफी महारत हासिल रखती है | 
         भोपाल के पटियों से लेकर इंदौर के छप्पन दुकानों तक कयासों की जुगाली है | वैसे शिव भी शिव हैं  ...बैठे बैठाएं समीकरणों को एक झटके में समेटने का हुनर रखते हैं | 
अब कयासों का क्या  ... दौड़ दौड़ कर थक जाते हैं और कभी उफ़ ... तुक्के से लग भी जाते ह
 
सत्ता के चेहरे में होगा बदलाव ? तो क्या इंदौरी भिया की तकदीर ज़ोर मार रही है ?