लौट के बुद्धू घर को आए | कृषि कानून डस्टबिन में | जीत की ख़ुशी में विपक्ष एकदम हवा में


मोदी बाबू ने अपने पुराने अंदाज टीव्ही पर आकर एक बार बड़ा ऐलान कर दिया | हालाँकि इस बार बाबू जी को अपनी ही सरकार के महत्वपूर्ण फैसले को पलटने की जानकारी देने आना पड़ा | प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा कि विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस  लिया जा रहा है | ज़ाहिर है कानूनों को लेकर लगातार होता  विरोध और आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती बन चले थे | खासकर उत्तरप्रदेश जैसा बड़ा चुनाव जब सिर  पर हो !

   सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है |  ऐसे में  पीएम नरेंद्र मोदी ने आज देश के नाम संदेश में साफ कर दिया है कि केंद्र इन तीनों कानूनों को वापस ले रहा है| पीएम मोदी ने कहा कि हम किसानों को समझा नहीं सके इसलिए इन कानूनों को वापस ले रहे हैं| 

पीएम मोदी ने कहा .. मैंने अपने 5 दशक के सार्वजनिक जीवन में किसानों की परेशानियों और चुनौतियों को बहुत करीब से देखा और महसूस किया है। जब देश ने मुझे 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में सेवा का अवसर दिया तो हमने कृषि विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी.
   देश के छोटे किसानों की चुनौतियों को दूर करने के लिए हमने बीज, बीमा, बाजार और बचत, इन सभी पर चौतरफा काम किया।सरकार ने अच्छी गुणवत्ता के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, स्वायल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा..
  हमने MSP बढ़ाई और रिकॉर्ड सरकारी खरीद केंद्र भी बनाए। हमारी सरकार द्वारा की गई उपज की खरीद ने पिछले दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। किसानों को उनकी मेहनत के बदले उपज की सही कीमत मिले, इसके लिए भी कदम उठाए। हमने ग्रामीण बाजार के बुनियादी ढांचा को मजबूत किया।
   आपदा के समय ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को आसानी से मुआवज़ा मिल सकें इसके लिए पूराने नियम बदले हैं। बीते 4 सालों में एक लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा का मुआवज़ा हमारे किसानों को मिला है।

यहाँ कृषि कानूनों की वापिसी से विपक्षी खेमें में जीत का माहौल है | विपक्ष इसे अपनी एक बड़ी फतह के तौर पर देख रहा है | सियासत के गलियारों में सफाई और श्रेय की राजनीति अब चरम पर है | 

      खैर कृषि कानून वापस डस्टबिन के हवाले हो चुकें हैं लेकिन कोई शक नहीं है कि आने वाले समय में भी इस फैसले को लेकर सियासत गरमाती  रहेगी | जहाँ भाजपा सफाई देने के लिए बेक़रार होगी तो विपक्षी दल अन्नदाताओं से धोखे का आरोप ज़िंदा रखकर किसान वोट बैंक को पाले में करने का हर संभव करेगा |