देश का एकमात्र मंदिर,जहाँ कृष्ण की दुल्हन हैं 'मीरा' | जानिए क्या है,इसके पीछे की वजह


 राधा,रुक्मणी की प्रतिमा के संग कृष्ण मंदिर तो बहुत देखें होंगे  | लेकिन सबसे बड़ी भक्त के साथ कृष्ण का मंदिर देखा या फिर सुना है ? 

यदि आपका उत्तर न में है तो अपनी जानकारी को और समृद्ध कर लीजिए |  लीजिए | जी हाँ...एक मंदिर ऐसा भी है,जहाँ कान्हा की प्रतिमा राधा,रुक्मणी के साथ न होकर उनकी सबसे बड़ी भक्त मीरा के साथ है | देश का यह इकलौता मंदिर है 422 वर्ष पुराना है | जानिए कहाँ स्थापित है और क्या विशेष है इस भव्य मंदिर में ?
 
देश के इस शहर में यह मंदिर 
 
 
मीरा के कृष्ण प्रेम से जुडी कथाओं से कौन परिचित नहीं है | लेकिन देश का एक मात्र मंदिर है जहाँ मीरा बाई भगवान कृष्ण के साथ वीराजी हुई हैं और उन्हें  पूजा भी जाता है | यह है, राजस्थान के जयपुर में आमेर स्थित जगतशिरोमणि मंदिर। जानकारी के अनुसार यह लगभग 422 साल पुराना मंदिर है | कहा जाता है कि यहाँ आकर आराधना करने वालो की हर मन्नत पूर्ण होती है | 
 
 
किसने करवाया था इस मंदिर का निर्माण 
 
 
इतिहास के जानकारों के अनुसार  जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह (प्रथम) की पत्नी रानी कनकावती ने अपने 14 साल के बेटे कुंवर जगत सिंह की याद में सन् 1599 में मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था। 9 साल चले निर्माण कार्य के बाद यह तीन मंजिला भव्य मंदिर वर्ष 1608 में बनकर तैयार हुआ। मंदिर का नाम जगत शिरोमणि मंदिर रखा गया। यहां भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना की गई।
 
जानिए जगत शिरोमणि मंदिर की विशेषताएं 
जगत शिरोमणि मंदिर जितना अधिक आस्था का केंद्र है,उतना ही भव्य,कलात्मक एवं सुंदर भी है  | इस मंदिर के अंदर का मंडप एक लालिमा लिए है | जिसकी वजह,इस मंडप का निर्माण लाल पत्थरों से किया जाना है | मंदिर में कृष्ण,मीरा बाई के साथ चतुर्भुज भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है | मंदिर में एक प्राचीन पालकी भी है। दुल्हन स्वरूप मीरा बाई की प्रतिमा को इस पालकी में बैठाकर मंदिर में विवाह के वक्त लाया गया था। आज भी देश विदेश से भक्त सिर्फ एक झलक के लिए खिचें चले आते हैं | मंदिर का भव्य तोरण द्वार देखते ही बनता है | यह मंदिर 17 वीं शताब्दी के आरंभ के महामेरू भवन की एक सटीक मिसाल है। मंदिर का गर्भग्रह जालीदार खंभ वाले मंडप से बना हुआ है। भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने एक मंडप प्रासाद में उनके वाहन गरूड़ भगवान विराजित है। वहीं, सुंदर संगमरमर के पत्थरों से बने सुंदर तोरण द्वार है। यहां दोनों तरफ हाथियों की प्रतिमा है। यहां दीवारों व छतों पर सुंदर भित्ति चित्र बने हैं, जो कि मंदिर की भव्यता को दर्शाते हैं। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय की मान्यता रखता है।
 
मंदिर से जुडी कुछ किवदंतियां भी है  ... जानिए 
 
यह मंदिर लाखों भक्तो की आस्था का केंद्र है | माना जाता है कि वर्तमान में भगवान कृष्ण की जो प्रतिमा स्थापित है,वो वही प्रतिमा है,जिसका चित्तौड़गढ़ में विवाह के बाद मीरा पूजती थी | बताया यह भी जाता है कि इस प्रतिमा को मेवाड़ पर आक्रमण करने वालों ने खंडित करने का प्रयास भी किया | इसके पश्चात कृष्ण की यह प्रतिमा जगत शिरोमणि मंदिर लाई गई | मीरा बाई की भी एक मूर्ति का निर्माण कर दोनों का विवाह सम्पन्न कराया गया | मीरा बाई की प्रतिमा का मंदिर में प्रवेश दुल्हन जैसा सजाकर ही करवाया गया था | 
 
 
लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पाई | 
 
राजस्थान में इस मंदिर को लेकर कई किवदंतियां हैं। इसके मुताबिक यहां भगवान श्रीकृष्ण की जो मूर्ति स्थापित है, यह वही प्रतिमा है, जिसका चित्तौड़गढ़ में विवाह के बाद मीरा बाई अपनी आराधना और भक्ति गान किया करती थी। बताया जाता है कि कई बार बाहरी मेवाड़ में आक्रमणकारियों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को नष्ट करने का प्रयास किया। मंदिर में वर्षों पुरानी पालकी भी है। दुल्हन स्वरूप मीरा बाई की प्रतिमा को इस पालकी में बैठाकर मंदिर में विवाह के वक्त लाया गया था।