डॉक्टरी की पढ़ाई में सियासत का तड़का ! टकाटक भविष्य की गारंटी


एमबीबीएस यानी .. डॉक्टरी की पढ़ाई करनें में शरीर की रचना से लेकर बीमारियों और दवाइयों को पढ़ाया जाता है । लेकिन साहब..अब इस सबके साथ मप्र के मेडिकल कॉलेजेस में   एथिक्स के नाम पर हेडगेवार और दीनदयाल उपाध्याय जी को भी पढ़ना होगा ।
अब ठीक हैं न ...इस सबका  डॉक्टरी से कोई मतलब नही लेकिन साहब सरकार दूरदर्शी है ।
बेहतर समझती है...सिर्फ डॉक्टर बन जाने से कुछ नही होगा बल्कि सियायत की बारहखड़ी भी आना आवश्यक है । अन्यथा सरकारी नौकरी तो दूर निजी अस्पताल चलाने में भी हवा टाइट हो जाना है ।
अब गुरु फिलहाल किस्मत भाजपा के साथ है । तो सरकार ने सकारात्मक सोच के साथ यह फैसला लिया है । ताकि संघ और  जनसंघ संस्थापक के विचार भेजे में अच्छी तरह से घुस जाएं और नए नवेले डॉक्टर बाबू अपना काम धंधा बेहतर तरीक़े से कर सकें । सिर्फ यह दो सज्जन नही बल्कि मामला बेलेंस करने के लिए अन्य शख्सियतों के विचार भी शामिल किए गए हैं । बोले तो साफ है कि काम के साथ सियासत का संगम मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है ।
अब साहब एक आंकड़े के अनुसार हर साल लगभग 2000 छात्र मेडिकल पढ़ाई के लिए दाखिला लेते हैं । अब एक हिसाब लगाइए । यह तो सिर्फ स्टूडेंट की संख्या... अब विचार यहां पनपेगा तो परिवार से होता हुआ...साथ में जुड़े कई लोगों के दिमाग में खलबल कर मारेगा ।
भोत गजब भैया..यह अच्छा है...हर लगे न फिटकरी और उफ्फ़...रंग भी चोखा आए