खिड़की खुलेगी - सच टपकेगा


 अभी आफत आई थी...अब मुखिया जी आये हैं ।

साथ में पोटली भी लाएं हैं । सब आओ... गोल घेरे में खड़े हो जाओ...सबको मिलेगा ..। मुखिया जी घोषणा की पोटली में...बहुत कुछ है । बर्तन भांडे,कपड़े लत्ते से लेकर मुर्गा मुर्गियों तक... मुंह न ताको...मिलने की गारंटी नही लेकिन सुनने का फूल मज़ा लो । मुई मंहगाई की तरह मप्र के ग्वालियर चंबल क्षेत्र में आफत भी टूटे पड़ी है । पुल पुलिया कागज की नाव की तरह बहे जा रहें हैं । लोगों के आशियानों में पानी ने तांडव मचा रखा है । बस जान बच जाए तो ऊपर वाले की मेहरबानी । जहां देखिए वहां...चिंता,घबराहट के बादल । मुखिया जी खासे सक्रिय है...पीड़ित क्षेत्रों में दौरे पर दौरा ज़ारी है और घोषणा की पोटली खुली पड़ी है । खैर किसको क्या और कब मिलेगा ...भगवान जाने पर...फिलहाल तो कानो को राहत मिलेगी । बोले तो जो मिलेगा उससे ही काम चला लीजिए...बाकी..उफ्फ़