हादसे के बाद भी सबक नही! देखिए खतरे के आग़ोश में मासूम


लापरवाही की ऐसी आंधी चली, जिसने 4 मासूम जानों की बलि ले ली।  इतना ही नही बल्कि माता पिता, दादा,दादी... उससे जुड़ी कई अन्य जिंदगियों में भी दर्द का तूफान खड़ा कर दिया है।
4 मौत तो सरकारी कागजों में दर्ज है। आंकड़ा तो 12 की खौफनाक दहलीज पार करता है।
दर्दनाक घटना के बाद सबक लिया होता तो भी मानवीयता  की जख्मों पर थोड़ा मलहम लगता लेकिन उफ्फ़...मरती संवेदनाओं को देखिए..बेशर्मी का कफ़न ओढ़कर सामने हैं।
सरकारी दावों के पीछे से झांकती सच की तस्वीरे देखिए...जुबां पर उफ्फ़ सरसरा जाएगा।

(साथ में चस्पा वीडियो ज़रूर देखिए। तस्वीरें हिला कर रख देंगी)

  एक पलँग पर 10- 10 बच्चों को रखा गया है। सिर्फ इतना ही नही बल्कि एक साथ कई मासूमों को ऑक्सीजन लगाकर इलाज की खानापूर्ति कर दी गई।
अब आम आदमी की मजबूरी देखिए...बेहाल तंत्र के भरोसे नौनिहालों छोड़ना ही नसीब है। भगवान एक मात्र सहारा तो सुंदरकांड का पाठ करके प्रार्थना ज़ारी है।
लेकिन संगदिल जिम्मेदारों के लिए तो सरकारी व्यवस्था का एक हिस्सा मात्र है। उफ्फ़.. जो चलता रहा है...और शायद चलता भी रहेगा।