भारत देगा आतंकियों की सरकार को मान्यता ?


        आपके भले ही तालिबान को लेकर तेवर तीखे हों | सोशल मीडिया पर तेल पानी लेकर तालिबानियों को कोसने वालों की भी कोई कमी नहीं  | मीलों दूर इधर बैठकर बोल वचनों से अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने वाले आतंकियों को पेलने में कोताही नहीं  | लेकिन यह  खबर थोड़ा झटका दे सकती है | 

ठीक है भैया  ... आप जैसे सोचना चाहो,वैसा सोचो | जो करना चाहो,वो करो  ..! 

लेकिन भारत सरकार तो तालिबान को लेकर नरम पड़ने लगी है | दोहा में तालिबान प्रतिनिधि से चर्चा के बाद यह और साफ़ हुआ है |  सवालों की झड़ी में एक सवाल और यह है.. भारत क्या आतंकियों की सरकार को मान्यता देगा ?

मुलाकात हुई - बात हुई

 

 

                                  मंगलवार ... तारीख़ 31 अगस्त को आखिरकार तालिबान और भारत सरकार के प्रतिनिधियों के बीच मुलाकात हो ही गई | विदेश मंत्रालय से दौड़ती आई सूचना ने ज़ाहिर किया कि ...क़तर की राजधानी दोहा स्थित भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने तालिबान के राजनीतिक प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानेकेजई से मुलाकात फ़रमाई | 

अब भैया लोगों की माने तो आधिकारिक रूप से माना अभी गया है लेकिन दोनों के बीच संपर्क लगातार बना हुआ था | हमारी सरकार ने सफाई दी है कि मुलाक़ात की पहल तालिबान की ओर से की गई | विदेश मंत्रालय की माने तो तालिबान से बातचीत का मुद्दा सुरक्षा और अफ़ग़ानिस्तान से भारतीयों की वापसी को लेकर रहा | भारतीय राजदूत ने तालिबान के प्रतिनिधि से कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल ना हो, इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए | 

भारत की चिंता 

 

 

                  भारत के सामने सुरक्षा के साथ बड़ी चिंता... अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वापिस लाना है | अब तक भारत 565 लोगों को सुरक्षित ला सका है | जिसमें कि 112 अफगानी नागरिक भी शामिल हैं | वर्तमान में 140 भारतीय एवं सिख समुदाय के लोग अभी भी काबुल में फंसे हुए,जो भारत जाने की बाट जोह रहे हैं | ऐसे में भारत को अपने तेवर नरम रखना भी आवश्यक है | भारत समझता है कि पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से तालिबान के साथ खड़े हैं | ऐसे में कोई भी जल्दबाजी ठीक नहीं होगी |