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कपडे ख़राब होने पर क्या करते हैं ? घर में साफ़ सफाई के काम में उपयोग कर लेते होंगे और नहीं तो कचरे के हवाले ! 
लेकिन तकनीक कमाल देखिए,पूरा मामला ही उल्टा करके रख दिया ? मतलब कचरे से कपड़ा बनाने में सफलता हासिल कर ली | 
 एकदम सही पकड़ें हैं  .... कचरे से बनाया जा रहा है इको फ्रेडंली कपड़ा और वो भी फुल फैशनेबल और चकाचक क्वॉलिटी के साथ | 
चलिए सस्पेंस को साइड में करके आपको पूरी जानकारी दे डालते हैं | 
 
टेक्सटाइल हब में फसलों के कचरे से तैयार किया जा रहा इको फ्रेंडली कपड़ा
      विज्ञान के इस दौर में तकनीक के मामले में अब हम इतने आगे बढ़ चुके हैं कि नई-नई अद्भुत चीजें इजाद हो रही हैं। गुजरात के अहमदाबाद में मटेरियल साइंस कंपनी चलाने वाली एक युवती ने फसलों के कचरे से इको फ्रेंडली फैब्रिक बनाने का काम शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों यह कंपनी टेक्सटाइल के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है।
 
 फसलों के कचरे से इको फ्रेंडली कपड़े
क्या आप सोच सकते हैं कि केला, अनानास और ऐसी कुछ फसलों के साथ कुछ बनाया भी जा सकता है, खासतौर पर कपड़ा। ये सुनने में थोड़ा नया और अद्भुत लगता है, लेकिन ये सच है और एक कमाल की तकनीक है। अहमदाबाद में मटेरियल साइंस कंपनी चलाने वाली शिखा शाह ने भी नहीं सोचा था कि जब उनकी कंपनी फसलों के कचरे से इको फ्रेंडली कपड़े बनाएगी,तो लोग इस तकनीक को हाथों-हाथ लेंगे।
 
अपशिष्ट को प्रॉसेस करके बनाते हैं फाइबर
      शिखा की कंपनी का नाम एल्टमेट है, जिसके जरिए खेती में फसलों से बचने वाले वेस्ट यानि अपशिष्ट को प्रॉसेस करके फाइबर, धागे और कपड़े तैयार किए जा हे हैं। ये सभी प्रोडक्ट पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल और बायो डिग्रेबल भी हैं और इन्हें रीसायकल भी किया जा सकता है।
शिखा शाह बताती हैं कि इस तकनीक से हम दो तरह की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। खेती के अपशिष्ठ का निराकरण और टेक्सटाइल के लिए मैटेरियल उपलब्ध कराते हैं। इसकी मांग भी बढ़ रही है।
 
अपशिष्ट से फाइबर फिर धागे और कपड़े
    विदेश में अपनी पढ़ाई पूरी करके शिखा जब अहमदाबाद लौटीं, तो नौकरी करने के बजाय अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। सबसे पहले उनका ध्यान गया,एग्रीकल्चर वेस्ट पर, जिसे जला दिया जाता है। उधर, टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी बड़े स्तर पर प्रदूषण का कारण हैं।
       इस दिशा में शिखा ने काफी रिसर्च किया, फिर अलग-अलग फसलों के कचरे को प्रोसेस करके उनसे फाइबर तैयार किया। उन फाइबर को धागे में तैयार किया गया और फिर उस धागे से कपड़ा बुना गया।
 
इस तरह रखा कंपनी का नाम
                शिखा कपड़ों को लेकर बताती हैं, इस धागे से बने कपड़े स्किन के लिए अच्छे हैं। यह प्लास्टिक या किसी अन्य माइक्रो प्लास्टिक नहीं है। एक तरह से नेचुरल एंटी बैक्टीरियल है। इसके बने कपड़े किसी भी मौसम में पहन सकते हैं। काफी मशक्कत के बाद शिखा ने एक सामान्य कपड़े का विकल्प यानि अल्टरनेटिव निकाला और इसलिए इस कंपनी का नाम एल्टमेट-एल्टरमेटिव मटेरियल रखा गया।
 
16 फसलों के कचरे को किया ट्रायल
           उनकी कंपनी के बनाए फाइबर,यार्न और फेब्रिक पूरी तरह से इको फ्रेंडली हैं और इन्हें बनाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता और न ही इनमें कोई माइक्रो प्लास्टिक है। शिखा ने अब तक करीब 16 फसलों के कचरे को ट्रायल किया है, लेकिन अभी कुछ पर ही काम हो पा रहा है, जिनमें केला,अननास, इंड्रस्ट्रियल भांग और बिच्छू बूटी शामिल हैं। शिखा के स्टार्टअप को फैशन फॉर गुड के साउथ एशिया इनोवेशन प्रोग्राम के लिए भी चुना गया है।