इसे कहतें हैं समय की मार । कभी थे जलवे । और उफ्फ़..आज मिले धक्के चार


इसे कहतें है समय ...कभी  नेता जी का झपाटेदार चरचाराटा था और आज बेचारों की किस्मत में धक्के गिरे पड़े हैं ।  
सोचिए पार्टी का बड़ा कार्यक्रम है ..और नेता जी बाहर गेट पर पुलिस वालों के धक्कों से नावाज़े जा रहें हो । 
वक्त ही है साहब ।
चलिए मामला बता देते हैं कि आखिर ज़ोर का झटका ज़ोर से ही क्यों लगा ।
जनाब ऐ आली भाजपा के वरिष्ठ नेता गोविंद मालू हैं । मालवा क्षेत्र में अच्छा रसूख है । 
इंदौर में ताजे भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री सिंधिया जी का कार्यक्रम था । 
भाजपा का हर छोटा बड़ा नेता महाराजा साहब की शान में अपनी हाज़री बजाना चाहता था । वैसे भी सियायत में चेहरा चमकाने का काम बेहद ज़रूरी है । 
बेचारे नेता जी भी पहुंचे । दिल मे आस थी । उसी आस को व्यवस्था में जुटी पुलिस ने रॉकेट बना मारा  । 
बेचारे नेता जी बुरा सा मुंह बनाकर..कोने में हो लिए । 
वक्त इसी को कहतें हैं ..कभी दमदार तो कभी उफ्फ़.. धक्केदार