रसोई मे छिपा ख़ज़ाने का राज़

रसोई मे छिपा ख़ज़ाने का राज़

बोलो बिंदास ...व्यवस्था से परेशान हो या फिर सकारात्मक कदमों के बाद आये बेहतर परिणाम ..सभी पर होगी नज़र

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इन रोगों से है परेशान.. तो यह है रामबाण इलाज

इन रोगों से है परेशान.. तो यह है रामबाण इलाज

अदरक : जैसा कि हम सब जानते हैं सेहत का खज़ाना हमारी रसोई मे ही छुपा हुआ है । रसोई मे ऐसी अनगिनत चीज़ें हमारे स्वास्थ्य के लिए किसी स्ंजिवनि बूटी से कम नहीं हैं । हम कोई भी छोटी-मोटी तकलीफ होने पर डॉक्टर के पास दौड़ लगा देते हैं । लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन छोटी-मोटी तकलीफ़ों को हम रसोई मे इस्तेमाल होने वाली चीजों से भी ठीक कर सकते हैं । जी हाँ यहाँ हम बात कर रहे हैं अदरक के औषधीय गुणों की । अदरक सिर्फ चाय, सब्जी या मसाले मे ही इस्तेमाल नहीं होता इसके और भी कई उपयोग हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी हैं । तो जानते है अदरक के चमत्कारी फ़ायदों के बारे मे । 
1 - कैंसर मे लाभकारी : अदरक कैंसर जैसी घातक बीमारी मे भी लाभकारी  होता है । अदरक के इस्तेमाल से कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और कैंसर के मरीजों को काफी राहत मिलती है । 
2 - डाईबीटीज़ मे लाभ : अदरक मधुमेह, और दिल के रोगों मे भी फ़ायदा  पहुंचाता है । इसके नियमित उपयोग से मधुमेह और दिल के रोगों का खतरा कम हो जाता है । 
3 - वज़न बढ़ाने मे सहायक : जिन लोगों को लगता है कि उनका वज़न कम है और वो अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं तो खाने के आधा घंटा पहले अदरक के कुछ टुकड़े लेकर उसमें एक चुटकी सेंधा नमक और 4-5 बूंदें नीबू के रस कि मिला कर सेवन करें । ऐसा 2 से 3 महीने तक करें वज़न बढ़ना शुरू हो जाएगा ।
4 - गठिया और जोड़ों के दर्द मे राहत : अगर आप गठिया या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो सौंठ, हल्दी और मेथी पावडर को बराबर मात्रा मे मिलाकर रख लें और सुबह-शाम गुंनगुने पानी या दूध के साथ एक चम्मच लें लाभ होगा । 
5 - एंटीओक्सीडेंट का काम : अदरक शरीर मे एंटीओक्सीडेंट का काम भी करता है । शहद के साथ लेने से सर्दी-खांसी, दमा और अस्थमा मे भी फ़ायदा पहुंचाता है । 
6 पाचन शक्ति बढ़ाए : अदरक के सेवन से आप अपनी पाचन शक्ति को भी दुरुस्त कर सकते हैं । इसे आप खाने के साथ,खाने के बीच मे या खाने के बाद ले सकते हैं । लाभ होगा ।  
7 - मोशन सिकनेस से राहत : अदरक आपकी मोशन सिकनेस को भी कम करता है । साथ ही साथ माइग्रेन और मासिक धर्म मे होने वाली पीड़ा को भी कम करता है । 
तो आपने जाना कि अदरक मे कितने चमत्कारिक गुणों का भंडार है जिससे आप छोटी-मोटी तकलीफ़ों को घर पर ही ठीक कर सकते हैं और राहत महसूस कर सकते हैं । लेकिन अगर फिर भी राहत न मिले तो अपने डॉक्टर कि सलाह ज़रूर लें ।

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माता की चौखट पर जलते चमत्कारी दीपक

माता की चौखट पर जलते चमत्कारी दीपक

धर्म : हिंदू धर्म में मान्यता है कि भगवान के सामने हमेशा घी का दिया ही जलाया जाता है। अगर हम तेल या किसी अन्य पदार्थ को दिया जलाने में उपयोग करते हैं तो ये ठीक नहीं माना जाता। लेकिन मध्य प्रदेश के गाड़िया घाट में माता जी का एक ऐसा ही चमत्कारिक मंदिर है जहां घी से नहीं बल्कि पानी से दिये जलाये जाते है और पानी से जलने वाले इन दियों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां पिछले 50 सालों से पानी के दिये जलाए जाते हैं। 

ये स्थान आगर-मालवा मार्ग के नलखेड़ा गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर  गुड़िया गांव के पास है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि लगभग 50 सालों से यहां पानी से दिए जलाए जाते हैं। उनका कहना है कि पानी को दिए में डालते ही दिए का पानी तैलीय हो जाता है और दिए जल उठते हैं। 

                                           

प्रचलित कथा : यहां के बारे में एक कहानी प्रचलित है कि एक रात यहां के एक पुजारी के सपने में माता जी आई और उन्होंने पुजारी से कालीसिंध नदी के पानी को दिए में डाल कर जलाने को कहा। सुबह उठकर पुजारी ने ऐसा ही किया और चमत्कारिक रूप से वो दिया जल गया। ये देख कर आस-पास के लोग हैरान रह गए। तभी से इस मंदिर में घी या तेल के स्थान पर पानी का दिया ही जलाया जाता है। 

                                                    

यहां रहने वाले लोग बताते हैं कि हर साल बरसात के मौसम में कालीसिंध नदी उफ़ान पर होती है तो ये मंदिर पानी में डूब जाता है और वहां कुछ दिनों के लिए पूजा-पाठ बंद हो जाता है। चैत्र नवरात्र आने पर यहां दोबारा पूजा शुरू होती है। 

तो आप भी अगर माता रानी के भक्त हैं और धर्म में गहरी आस्था रखते हैं तो 6 अप्रैल से शुरू होने वाली इस चैत्र नवरात्र में इस मंदिर मे जाकर एक दिया ज़रूर जलायें।

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स्वाइन फ्लू के उपाय, लक्षण और परहेज

स्वाइन फ्लू के उपाय, लक्षण और परहेज

वायरल : स्वाइन फ्लू ने एक बार फ़िर अपने पैर पसार लिये हैं और ये तेज़ी से बढ़ता जा रहा है और जानलेवा साबित हो रहा है। यहां आप जानेंगे स्वाइन फ्लू के लक्षण, घरेलू उपाय और इसमें होने वाले परहेज़ के बारे में।

 

1 : घरेलू उपाय :-

1. स्वाइन फ्लू को नियंत्रित करने के लिए ताज़ा तुलसी के 15-20 पत्तों को ख़ाली पेट नियमित रूप से खाना चाहिए।

2. नमक और हल्दी को उबालकर गुनगुने पानी से ग़रारे करने चाहिए।

3. गर्म पानी से दिन में दो से तीन बार हाथ-पैर धोने चाहिए।

4. स्वाइन फ्लू से बचने के लिए अदरक और तुलसी को पीस कर सुबह ख़ाली पेट शहद के साथ लेना चाहिए।

5. देसी कपूर को एक गोली के बराबर टुकड़े को महीने में एक या दो बार गुनगुने पानी से निगल सकते हैं। बच्चों को कपूर, आलू या केले के साथ देना चाहिए।

6. थोड़ा देसी कपूर, छोटी इलायची, पुदीने की सूखी पत्तियों और हल्दी को पीसकर चूर्ण बनाकर एक साफ़ कपडे की पोटली बना लें और दिन में इसे कई बार सूंघे।

 

2 : स्वाइन फ्लू के लक्षण:-

1. शरीर में भारीपन।

2. ज़्यादा और तेज़ बुखार।

3. सर्दी-खांसी।

4. तेज़ सिरदर्द।

5. गले मे ख़राश।

6. नाक से लगातार पानी आना।

7. कमज़ोरी व थकान।

 

3 : परहेज़:-

स्वाइन फ्लू के रोगियों को दही, शीतलपेय, फ्रिज में रखा बासी भोजन, आइसक्रीम जैसे कफ उत्पन्न करने वाले खाद्यपदार्थों से परहेज़ करना चाहिए।

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उफ्फयह, होली के अचूक उपाय

उफ्फयह, होली के अचूक उपाय

होली : इस दिन लोग आपसी कटुता और वैरभाव को भुलाकर एक-दूसरे को इस प्रकार रंग लगाते हैं कि लोग अपना चेहरा भी नहीं पहचान पाते हैं। रंग लगने के बाद मनुष्य शिव के गण के समान लगने लगते हैं जिसे देखकर भोलेशंकर भी प्रसन्न होते हैं।

उपाय- मनचाहे वरदान के लिए होली के दिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूरी होगी। 


- होली की सुबह बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। साथ किसी मंदिर में शंकर जी को पंचमेवा की खीर चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होती। 

- व्यापार में लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, इससे  व्यवसाय में लाभ होता है। 

- होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दुकान में या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, इसे करने से लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है। 

 

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जानें क्या प्रभाव पड़ता दूसरे की घड़ी पहनने से

जानें क्या प्रभाव पड़ता दूसरे की घड़ी पहनने से

घड़ी : बचना चाहिए किसी और की घड़ी पहनने से :

                                      

जरूरत के समय अक्सर हम किसी दूसरे की चीजें उपयोग कर लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूसरों की चीजें हम पर किस तरह से प्रभाव डालती हैं। वास्तुशास्त्र में इन चीजों को दुर्भाग्य से जोड़ा गया हैं। यहां कुछ ऐसी चीजें हैं, जिसे कभी भी दूसरों का उपयोग नहीं करना चाहिए। हर इंसान में अपनी नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा होती है। वास्तु मे कहा गया है कि हमें कभी भी किसी और किसी की चीजें इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इस लिए वास्तु के अनुसार हमें दूसरों की की इन चीजों को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कभी भी किसी की घड़ी अपनी कलाई पर नहीं बांधनी चाहिये। ऐसी मान्यता है कि जो दूसरों की घड़ी बांधता है वो जीवन में कभी ऊंचाइयों पर नहीं पहुंच पाता। यही नहीँ किसी और की वजह से आप के द्वारा की गई मेहनत भी बेकार हो जाती है। किसी और का दुर्भाग्य आपके भाग्य को दुर्भाग्य मैं बदल सकता है। इस लिए किसी की कोई भी चीज़ इस्तेमाल करने में सावधान बरतें।

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उफ्फ, सकारात्मक ऊर्जा का महत्व

उफ्फ, सकारात्मक ऊर्जा का महत्व

उफ़्फ़ ये धर्म : सदा ऊर्जावान रहे आपका घर - नकारात्मक ऊर्जा हमारे जीवन को बहुत हद तक प्रभावित करती है। हमेशा ऐसी व्यवस्था रखें कि आपके घर और बाहर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता रहे। कहने को तो सभी कहते हैं कि हमें अपने वातावरण को साफ एवं सवच्छ रखना चाहिए, गंदगी नहीं फैलानी चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। लेकिन ऐसा बहुत कम लोग करते हैं। शायद इसलिए क्योंकि वे सकारात्मक ऊर्जा का महत्व नहीं समझते। इसके लिए क्या करें क्या न करें ये समझना जरूरी है। तो आइये जानते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

- कोशिश करें कि घर के खिड़की दरवाज़े खुले रह सकें। घर और सामान आदि की सजावट की वजह से दरवाज़े खिड़कियों को बंद न रखना पड़े।

- रसोईघर की अपनी ऊर्जा होती है। यहां ढेर सारा सामान प्लेटफार्म पर नहीं रखना चाहिए और डिब्बों को साफ और व्यवस्थित रूप से रखना चाहिए।

- घर में कोई भी टूटा-फूटा या ज़ंग लगा सामान नहीं रखना चाहिए। फ़टे-पुराने या रंग उड़े कपड़ों को भी घर से बाहर कर देना चाहिए।

- घर मे हवा के प्रवाह की भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। हवा बाधित नहीं होनी चाहिए, और घर में चलना -फिरना भी सहजता से हो। इस तरह की व्यवस्था घर में होनी चाहिए।

- सामान बिखरा हुआ नहीं होना चाहिए। सारी वस्तुएं अपने स्थान पर होनी चाहिए। किसी भी तरह की अस्त-व्यस्तता से सकारात्मक ऊर्जा बाधित हो कर नकारात्मक ऐसे पैदा करती है।

- घर की किसी भी सतह पर धूल नहीं जमने देना चाहिए, अलमारी के खाने हों या किसी टेबल की सतह, स्टूल हो या टीवी का रैक, किसी भी सतह पर धूल नहीँ होनी चाहिए।

- केवल बैठक ही नहीं जहां मेहमानों  का आना जाना होता है बल्कि पूरे घर को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।

- प्रार्थना के स्वरों को अपने घर में स्थान दें। घर में घंटियाँ लगाएं।

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उफ्फयह, तांबे के बर्तन के फायदे

उफ्फयह, तांबे के बर्तन के फायदे

उफ़्फ़ ये सेहत : तांबे के बर्तन से पानी के बैक्टीरिया मर जाते हैं और इसके कई वैज्ञानिक फायदे भी हैं। पूजा -पाठ या अन्य धार्मिक अनुष्ठानों मे जो जल इस्तेमाल किया जाता है वो तांबे के लोटे में ही रखा जाता है। हिन्दू धर्म में सूर्य नमन का बड़ा महत्व है। सुबह उठने के बाद नहाने के पश्चात सबसे पहले सूर्य भगवान को जल अर्पित करने की मान्यता है। सूर्य नमन करते समय भी उपयोग किया जाने वाला जल तांबे के कलश में ही होता है। तांबे के बर्तनों के उपयोग भी आज आम हो गया है|

तांबे के बर्तन से पानी पीने के फ़ायदे-

1- तांबे के बर्तन में रखे पानी में बैक्टीरिया ख़त्म करने की क्षमता होती है। इस लिए इसे डायरिया, दस्त और पीलिया को रोकने में मददगार माना जाता है।

2- तांबे के बर्तन में पानी रखने की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पानी कभी भी बासी नहीं होता और इसे लंबे समय तक रखा जा सकता है।

3- आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखे पानी में शरीर के तीन दोषों वात, कफ और पित्त को संतुलित करने की क्षमता होती है।

4- विशेषज्ञों के अनुसार ताम्बे के बर्तन में रखे पानी को पीने से शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है।

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उफ्फ, मंत्र जाप मालाओं के ये प्रकार

उफ्फ, मंत्र जाप मालाओं के ये प्रकार

मंत्र जाप माला : मंत्र जाप मे उपयोग में आने वाली हर माला का होता है अलग महत्व। हम सभी अपने इष्टदेव को प्रसन्न करने के लिए अलग अलग प्रकार की पूजा पाठ करते हैं इसी कड़ी मे मंत्र जाप भी आता है। हर मंत्र जाप के अलग अलग फ़ायदे होते हैं। इस लिए मंत्र जाप करने के लिए अलग-अलग मालाओं का प्रयोग करना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि अलग अलग मालाओं का क्या महत्व होता है|

तुलसी की माला : तुलसी की माला से देवी मां और भगवान शिव के मंत्र का जाप नहीं किया जाता। तुलसी की माला द्वारा भगवान विष्णु के मंत्र का जाप किया जाता है इसलिए ये माला बहुत महत्वपूर्ण होती है।

 

 

चंदन की माला : चंदन की माला दो प्रकार की होती है, एक सफेद चंदन दूसरा लाल चंदन। दुर्गा माँ के मंत्र का जाप लाल चंदन और भगवान कृष्ण के मंत्र का जाप सफेद चंदन से की माला से किया जाता है|

 

 

 

रुद्राक्ष की माला : भगवान शिव को रुद्राक्ष बेहद प्रिय है। रुद्राक्ष की माला से किसी भी मंत्र का जाप किया जा सकता है। इएलिये महामृत्युंजय का जाप रुद्राक्ष की माला से ही करना चाहिए। वैसे माना जाता इस माला से किसी भी मंत्र का जाप किया जा सकता है।

 

 

 

स्फटिक की माला : स्फटिक की माला का प्रयोग धन प्राप्ति और मन को एकाग्र करने के लिए किया जाता है। माता लक्ष्मी के मंत्र का जाप इसी माला से करना चाहिए। उच्च रक्तचाप में इस माला के पहनने से भी लाभ मिलता है।

 

 

 

हल्दी की माला : मनोकामना पूरी करने के लिए हल्दी की माला का प्रयोग किया जाता है। गुरु बृहस्पति और मां बगुलामुखी के मंत्र का जाप इसी माला से किया जाता है। हल्दी की माला से विद्या प्राप्ति, संतान प्राप्ति और ज्ञान प्राप्ति के लिए मंत्र जाप किया जाता है।

 

 

 

कमलगट्टे की माला : कमलगट्टे की माला का प्रयोग धन वैभव की प्राप्ति के लिए किया जाता है। शत्रुओं के नाश के लिए भी कमलगट्टे की माला का प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह माला मां लक्ष्मी जी को बहुत प्रिय होती है। मंत्र जाप के बाद इस माला को पूजा स्थान में रखना चाहिए।

 

 

किसी भी माला के प्रयोग में ये सावधानियां बरतनी चाहिए।

1 - मंत्र जाप के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि माला पूरी तरह से ढंकी होनी चाहिए।

2 - हर दाने के बाद एक गांठ ज़रूर लगी होनी चाहिए।

3 – मंत्र जाप के लिए उपयोग की जाने वाली माला हमेशा 108 या 27 दाने की होनी चाहिए।

4 – मंत्र जाप के बाद माला मंदिर में रखनी चाहिए।

5 – मंत्र जाप करते समय तर्जनी उंगली का हाथ के पंजे के अन्य हिस्सों से स्पर्श नहीं होना चाहिए।

6 - माला हमेशा अपनी ही उपयोग करनी चाहिए, किसी और को इसका प्रयोग न करने दें।

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ताज़ा उफ्फ

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