कुछ भी खाकर सेहत से न करें खिलवाड़

कुछ भी खाकर सेहत से न करें खिलवाड़

सेहत : आज के समय में मूड अच्छा करने के लिए चटपटा खाना जीभ को भाता है। खराब मूड में भी लोग चटपटे या मीठे खाने की सोचते हैं। समस्या यह है कि जीभ को भाने वाले स्वाद सेहत के लिए कभी कभार भारी पड़ जाते हैं। क्या खाएं कि मूड भी अच्छा रहे और सेहत भी।

 इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में कई बार जब हम उदास होते हैं तो ज्यादा तीखा और चटपटा खाना खाने लगते हैं। हमारे हाथ में जो आता है, खाते चले जाते हैं। इसमें भी हम तला-भुना या मीठा ही ज्यादा खाना पसंद करते हैं। इसे खाकर लगता है कि जैसे अब मूड ठीक हो जाएगा, लेकिन क्या आप यकीन के साथ कह सकती हैं कि इन चीजों से मूड सुधर जाता है? जुबान को स्वाद में अच्छी लगने वाली ये चीजें सेहत के लिहाज से खराब साबित हो सकती हैं। अपनी फूड हैबिट को थोड़ा बदलने की कोशिश करें और देखें किस तरह आपका मूड भी अच्छा रह सकता है और सेहत भी। 

मिठाई और चॉकलेट

                                                             

जब आपका मन खराब हो या लो फील कर रही हों तो अक्सर आसपास के लोग मीठा खाने को कहते हैं। इसमें भी अगर चॉकलेट मिल जाए तो क्या बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चॉकलेट (डार्क चॉकलेट छोड़कर) सेहत के लिए नुकसानदायक होती है। यदि मूड स्विंग हो रहा हो या फिर पीरियड्स से पहले या यूं ही कभी कुछ मीठा खाने का मन हो रहा हो तो अपने पसंदीदा फलों को खाने पर विचार करें। फलों की शर्करा शरीर में धीरे-धीरे अवशोषित होती है, जिससे अचानक ऊर्जा का स्तर कम या ज्यादा नहीं होता। इसके बाद भी यदि चॉकलेट खाने की तीव्र इच्छा हो रही हो तो फलों की प्लेट पर ऊपर से थोड़ा सा चॉकलेट सॉस डाल लें।

 

कुल्फी

                                       

कुल्फी ज्यादा तर गर्मीयो में खाई जाती है इसमें कैलोरी पर्याप्त मात्रा में होती है, क्योंकि इसे बनाने के लिए ढेर सारी क्रीम, मावा, दूध, मेवे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। दूध को गाढ़ा करके बनाने से इसके जरूरी विटमिंस कम हो जाते हैं। कैलोरी ज्यादा होने के कारण यह देर से पचती है। वहीं इसके देर से पचने के चलते जिन्हें पेट संबंधी समस्या या दूध से एलर्जी यानी लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या हो, उनके लिए यह नुकसानदेह भी हो सकती है। 

नमकीन

                                     

नमकीन का इस्तेमाल ईवनिंग स्नैक्स के रूप में अक्सर हम बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद नमकीन या चिप्स के रूप में करते है।आसानी से बनने और मिलने वाले नमकीन मूंगफली, बेसन, चावल, मक्का, मटर आदि का मिश्रण वाले ये पदार्थ स्वाद के नजरिये से देखे जाये तो अच्छे लगते है, लेकिन इनमें अत्यधिक मात्रा में सोडियम व मोनोसोडियम ग्लूटामेट मौजूद होता है, जो सेहत के लिए खतरनाक होता है। नमकीन मेवे पसंद हों तो घर पर ही इन्हें तैयार करें, जिससे नमक की मात्रा को नियंत्रित रखना आसान हो जाएगा।

हरी सब्जियां

                                   

हरी पत्तेदार सब्जियों के बारे जितना भी कहा जाये कम है। क्योंकि हरी सब्जियों से बेहतर तो कुछ नही हो सकता है। खासतौर पर पालक में भरपूर विटामिन बी पाया जाता है, जो उदासी को दूर भगाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, न केवल पालक बल्कि सभी प्रकार की हरी पत्तेदार सब्जियों व फलों का सेवन प्रतिदिन कम से कम तीन-चार बार करना ही चाहिए। इससे शरीर स्वस्थ रहने के साथ ही विभिन्न प्रकार की मानसिक समस्याओं में भी राहत मिलती है।

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उफ़्फ़...काका की यादों में नेता जी..

उफ़्फ़...काका की यादों में नेता जी..

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#काका की उम्र लगभग 85 की सीमा लांघ कर हांफ रही थी । सारे अंगों ने यह कहते हुये काम करना कम कर दिया था कि ..काका खुद तो रिटायर होकर पड़े हो और हमें अभी भी घसीटे पड़े हो । बाकी का तो ठीक लेकिन याददाश्त तो मानो रुठ कर बैठी थी । कुछ फर्ज ही न निभाती । बेचारे काका 10 मिनिट पहले हुयी बात को भी भूल जाते...।

पड़ोस में रहते हैं तो कभी कभार औपचारिक बातचीत हो जाती है । 

आज घर से निकला तो शायद वो मेरी ही तलाश में घर के पोर्च में जमे थे । 

मैं घर से निकल कर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ा तो अचानक हांफती आवाज में काका ने पुकार लिया..

"आसिष....ज़रा सुनो बेटा"

काका ने बुलाया...आश्चर्य लगा खैर बजाये गाड़ी में ठसने के काका की ओर बढ़ लिया ।

"प्रणाम...काका"

मैं आगे कुछ और बोलता इससे पहले ही काका ने टोक दिया..।

"अरे वो अब ठीक...तुम बताओ.. भोपाल से क्या #वो_पुराने_नेताजी चुनाव लड़ रहें हैं  ? 

बड़े बेसब्र थे उत्तर सुनने को..

मैंने कहा ..."हां.. काका'

फट से दूसरा सवाल टपका..

"वही जो पहले मुखिया भी थे ?

जी....काका 

अरे वही लालटेन वाले ?

जी..शायद...। 

मैंने भी एक संक्षित उत्तर आगे बढ़ा दिया । 

"वही जो अपने बयानों के लिये मशहूर है ?

लगातार सवालों से कोफ्त खाते हुये मैंने बजाय उत्तर देने के उलटा सवाल दाग दिया ..

"जब आपको सब याद है तो मुझ से क्यों पूछ रहे हो आप"

काका बोले.."बेटा इसलिये क्योंकि उन्होंने ने तो सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी ?

गजब ..काका की याददाश्त वैसे तो फूफा की तरह रुठी रहती थी लेकिन आज खूब भड़क रही थी ..। खैर मैंने स्पष्ट किया..। 

"अरे काका ..सिर्फ 10 साल की बात थी वो तो...और अब अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिये फिर से सक्रिय हुये हैं" ।

काका के बूढ़े चेहरे पर व्यंग्य वाली मुस्कराहट आ गई..।

बोले..."सुनो...जब मुझे जैसे बूढ़े... जिसकी याददाश्त मेहमान की तरह रहती है...उसे सब याद है तो भला और मतदाताओं को याद न होगा?

सवाल तो था सौ टके का । खैर अपन ने काका को जय राम जी कहते हुये कर्मस्थली की राह पकड़ ली। 

वहां कार सरपट दौड़ रही थी तो यहां ज़हन में सवाल कूद रहा था कि वाकई नेता जी ने एक बार फिर चुनावी संग्राम की ओर रुख तो कर लिया लेकिन #उफ़्फ़यह.. पुरानी छवि का साया । 

दरअसल..वर्तमान मुखिया जी की सोच या फिर और कोई समीकरण ? 

कहा गया कि बडे नेता ऐसे गढ़ों में सेंध लगाने का काम करें जो विपक्ष के लिये महफ़ूज हैं । सो..सोच को आकार देते हुये पूर्व मुखिया जी को भोपाल लोकसभा सीट से कूदा दिया गया । हालांकि पूर्व मुखिया जी काफी धाकड़ नेता हैं और गोटियां बैठाने में बेशक माहिर...लेकिन छवि ज़रूर हिलोरें मार रही है और विपक्ष भी इस कमज़ोरी का लाभ सिर्फ भोपाल ही नही बल्कि अन्य 28 सीटों पर भी लेने को आमादा ..।

खैर ऊंट है....बैठने का मूड का कोई अंदाजा नही ...।

इंतज़ार करते है कि काका के दिमाग मे बैठी छवि दम मारती है या फिर मुखिया जी का दिमाग सारे समीकरणों पर भारी पड़ता है...

बस कुछ दिन और ?

- आशीष चौबे,भोपाल

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उफ्फयह, प्रेम-मंदिर की होली

उफ्फयह, प्रेम-मंदिर की होली

होली : वैसे तो होली की धूम पूरे देश में है जहां हर प्रान्त में रंगों का ये त्योहार अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। वहीं उत्तर-प्रदेश में तो इस त्योहार की अलग ही मस्ती देखने को मिलती है। आपने अभी तक बरसाने की लठ्ठमार होली के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि वृंदावन की होली बहुत खास होती है। खासकर यहां के प्रेम-मंदिर में मनाई जाने वाली होली।

वृंदावन में भगवान कृष्ण का बचपन बीता है, इसी वज़ह होली का जो रंग आपको यहां देखने को मिलेगा वो और कहीं नहीं मिलेगा।

                  

वृंदावन का ये प्रेम-मंदिर संगममर से बना हुआ है। कृपालु महाराज ने इस मंदिर को बनाने की घोषणा 2001 में ही कर दी थी। 2012 में यहां ये मंदिर बनकर तैयार हो गया था। होली पर इस मंदिर में विशेष आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर यहां पर राधा-कृष्ण का फूलों और रंगों से विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद फूलों और प्राकृतिक रंगों की बौछार की जाती है। होली के इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए देश-विदेश के लोग यहां आते हैं।

इस मंदिर में गोवर्धन लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीला सहित राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकियां उद्यानों के बीच सजाई जाती हैं। इस मंदिर में कुल 94 स्तंम्भ हैं जो राधा- कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से सजाये जाते हैं। यहां अधिकांश स्तंभों पर गोपियों की मूर्तियां अंकित हैं।

तो अगर आप भी इस बार अपनी होली यादगार बनाना चाहते हैं तो वृंदावन के प्रेम-मंदिर की होली का अनुभव कीजिये। आपका ये अनुभव जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

                

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50 साल बाद मिला माता पिता का बधाई पत्र

50 साल बाद मिला माता पिता का बधाई पत्र

मिशिगन : अमेरिका के मिशिगन के रहने वाले 78 साल के रॉबर्ट फिंक ने 1969 मे ग्रैजुएशन किया था। रॉबर्ट ने बताया कि उस समय वो अपने कुछ दोस्तों के साथ न्यूयॉर्क में पढ़ाई कर रहे थे और उनका परिवार मिशिगन में ही रह रहा था। रॉबर्ट ने जब ग्रेजुएशन किया तब उनके माता-पिता ने उन्हें एक पत्र लिख कर बधाई दी थी। वो पत्र रॉबर्ट को उस वख्त न मिलकर 50 साल बाद मिला। दरअसल, वेस्टर्न यूनियन टेलीग्राम ने पत्र पहुंचाने की सुविधा उस समय बंद कर दी थी। लेकिन पिछले साल यह सुविधा दोबारा शुरू की गई। और इसके बाद काफ़ी खोजबीन के बाद रॉबर्ट फिंक के पास ये टेलीग्राम पहुंच सका। रॉबर्ट कहते हैं कि यह टेलीग्राम मिलने के बाद मुझे अपने पुराने दिन याद आ गए। औए मैं अपने माता-पिता का बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे ये पत्र भेजा।

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उफ्फयह, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

उफ्फयह, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

खास बात : आज सुबह से जहां नज़र डालो, चाहे अख़बार हो, टीवी हो या ऑफिस के लिए निकलते समय दिखने वाले होर्डिंग्स हों, सभी नारी शक्ति के विचारों से सटे पड़े हैं। फिर याद आया कि हाँ आज तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। महिलाओं के सम्मान का दिन, जीवन में महिलाओं के महत्व का दिन। लगा कि क्या महिला की भूमिका और समर्पण को साल में एक दिन ही याद किया जाना काफी है? क्या साल के बाकी दिन महिलाएं इस मान-सम्मान की हक़दार नहीं? फ़िर अपने-आप को समझाया कि नहीं ऐसा नहीं है, महिलाओं के जीवन में महत्व और समर्पण को तो सभी जानते और मानते हैं लेकिन उसे जताने के लिए एक ख़ास दिन की ज़रूरत है।

नारी सम्मान में आज जितने भी विचार प्रकाशित हुए हैं उनमें पुरुष वर्ग ने बढ़-चढ़ कर अपनी उपस्तिथि दर्ज़ कराई है। कोई कह रहा है कि जादू है, रौनक है, संवार है स्त्री, कोई कह रहा है प्रकृति के हर रूप में स्त्री होती है, तो कोई कहता है कि स्त्री ही मकान को घर बनाती है, किसी के विचार में स्त्री सा दोस्त और सलाहकार कोई और नहीं, स्त्री अन्नपूर्णा है, स्त्री ही ममता है और पता नहीं क्या-क्या।

लेकिन क्या वास्तव में हम हमेशा अपने इन्हीं विचारों पर अडिग रहते हैं, अगर हां तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। तो आइये अपने इन्हीं विचारों के साथ एक बार फिर आप सभी को महिला दिवस की ढेरों शुभकामनाएं।

 

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उफ़्फ़ यह, खबर ज़रा हट के

उफ़्फ़ यह, खबर ज़रा हट के

गुजरात : सूरत का एक स्कूल, जहां बच्चे पहनते हैं सेना की वर्दी जैसी यूनिफार्म : गुजरात के सूरत में कैलाश मानस विद्द्या मंदिर स्कूल में छात्रों को सेना की वर्दी की तरह दिखने वाली यूनिफार्म में पीटी कराई जाती है। इस स्कूल की प्रधानाचार्य इंदिरा पटेल के अनुसार सेना की वर्दी की तरह दिखने वाली ये यूनिफार्म पिछले 15 सालों से स्कूल में चल रही है। इंदिरा पटेल ये भी बताती हैं कि इस यूनिफार्म को पहनाने का मक़सद सेना को सम्मान देना है। इंदिरा कहती हैं कि हमारा एक मक़सद ये भी है कि बच्चे सेना के बारे में जानें और उसका सम्मान करें। छात्र हफ़्ते में दो दिन पीटी के समय इस यूनिफॉर्म को पहनते हैं।

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कैलोरी बर्न करने के आसन तरीके

कैलोरी बर्न करने के आसन तरीके

सेहत : मोटापा हमारे देश की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या है। मोटापा सिर्फ़ हमारी शारीरिक सुंदरता को ही नहीं छुपाता बल्कि कई बीमारियों को भी आमंत्रण देता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास इतना समय नहीं है कि वो जिम में जाकर घंटों पसीना बहाये और अपने-आप को फिट रखे। यहां हम आपको कुछ ऐसे तरीक़े बता रहे हैं जो बिना एक्स्ट्रा टाइम निकले, बिना पैसे ख़र्च किये और बिना किसी जिम में जाये आप अपने-आप को फिट रखने में मददगार साबित होंगे।

1 : सबसे पहले तो हरी सब्जियों, और फ़लों को अपनी डाइट में शामिल करें। लंच और डिनर जल्दी और समय पर करें और फास्टफूड से दूर रहें।

                                                       

2 : झाड़ू-पोछा : डस्टिंग करने और झाड़ू-पोंछा लगाने से 300 से 350 कैलोरी बर्न होती हैं। इससे शरीर सुडौल होता है और मसल्स मज़बूत होती हैं। पोंछा लगाने के लिए जब आप बार-बार ऊपर-नीचे झुकते हैं तो इससे पेट और जांघों पर जमा फेट कम होने लगता है।

                                                      

3 : बागबानी : बागबानी करने से 400 कैलोरी तक बर्न हो जाती हैं। इससे मसल्स की कार्यक्षमता बढ़ती है और जोड़ों में लचीलापन आता है। यदि आप रोज़ सिर्फ़ 30 मिनिट बगीचे में पानी देने या निंदाई-गुड़ाई जैसा काम करते हैं तो पेट, हाथ और हिप्स पर प्रेशर पड़ता है जिससे फेट कम होता है।

                                                      

4: कपड़ों की धुलाई : वाशिंग मशीन के बजाय अगर आप हाथ से कपड़े धोते हैं तो ये आप को फ़िट रखने में मददगार साबित होगा। हाथ से कपड़े धोते समय आपके पूरे शरीर की एक्सरसाइज होती है। एक घंटे कपड़ें धोने और सुखाने से 130 से 150 कैलोरी आप बर्न कर सकते हैं।

                                                      

5: बाथरूम की सफ़ाई : बाथरूम साफ़ करना बहुत मेहनत का काम है लेकिन इससे आप को कैलॉरी बर्न करने में बहुत मदद मिलती है। इसमें सबसे ज्यादा पैरों, हिप्स व पेट के आसपास की मसल्स काम करती हैं। साथ ही हाथों और कंधों को मज़बूती मिलती है। टाइल्स की सफ़ाई करने से पेट व हिप्स की चर्बी बहुत जल्दी कम होती है। बाथरूम साफ़ करने से 200 तक कैलोरी बर्न होती है।

                                                   

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एग्जाम के समय बच्चों पर दें खास ध्यान

एग्जाम के समय बच्चों पर दें खास ध्यान

मेरी भी सुनो : ये समय है परीक्षा का। परीक्षा मतलब एग्जाम, ये परीक्षा सिर्फ बच्चों की ही नहीं है पेरेंट्स की भी है। जहाँ बच्चे साल भर मेहनत करते हैं इस परीक्षा में सफल होने के लिए, वहीं उनके माता-पिता भी कोई कसर नहीं छोड़ते अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए। चाहे वो उनके उठने का समय हो, उनके स्कूल जाने का रूटीन हो, या उनके पढ़ने-लिखने या खेलने-कूदने का समय,  माता-पिता की अहम भूमिका होती है की बच्चे सही समय पर अपने सारे काम निपटा लें। परीक्षा के समय भी माता-पिता अपने बच्चों को कुछ इस तरह से सपोर्ट कर सकते हैं।

 

1. खान-पान का ध्यान : परीक्षा के समय बच्चों के खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें डेयरी प्रोडक्ट के साथ-साथ प्रोटीन युक्त भोजन देना चाहिए। इस दौरान फ़ास्ट फ़ूड से दूरी बनाये। उन्हें दूध-दही, मट्ठा औए फ़ल अधिक से अधिक मात्रा में दें, जिनसे उन्हें इंस्टेंट एनर्जी मिलेगी।

                                                   

2. गैजेट से दूरी : जितना हो सके इस समय बच्चों को टीवी, मोबाइल से दूर रखें। उन्हें मूड़ फ़्रेश करने के लिए आउट डोर गेम्स खेलने के लिए प्रेरित करें।

                                                

3. बच्चों का साथ दें : जब बच्चे देर रात तक पढ़ाई कर रहे हों तो उनके खाने-पीने का ध्यान रखें। आप उन्हें कंपनी देने के लिए उनके साथ बैठकर कोई किताब भी पढ़ सकते हैं।

                                                   

4. मॉरल सपोर्ट : आप अपने बच्चों का साथ दें। उन्हें समझाएं की वो शांत मन से पढ़ाई करें, उन्हें तनाव लेने की या घबराने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें बताएं कि कैसी भी परिस्तिथि हो आप उनके साथ हैं।

                                          

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जय हो अभिनंदन

जय हो अभिनंदन

सुनों : देश में पहले पुलवामा अटैक पर चर्चा, फिर पाकिस्तान अटैक पर चर्चा । लेकिन देश में अब किसी की चर्चा है तो वो है विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की। अभिनंदन हमारे देश का वो जांबाज़ सिपाही है जो अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा की ख़ातिर किसी भी हद तक जा सकता है। पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों का पीछा करते हुए अभिनंदन का एयरक्राफ्ट पाकिस्तान की सीमा में चले गए। जिसे पाकिस्तानी आर्मी ने क्रैश कर दिया था, क्रैश के बाद अभिनंदन पैराशूट से उतरे लेकिन उन्हें ये नहीं पता था की वह कहां पर है पैराशूट से बाहर निकलते ही पाकिस्तानी आर्मी ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया।

अब ये जांबाज़ पाकिस्तान आर्मी की गिरफ्त में है। लेकिन दाद देनी होगी उनकी हिम्मत की। पाकिस्तान की ओर से जरी किये गये वीडियो में विंग कमांडर अभिनंदन के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी। पाकिस्तानी आर्मी की ओर से पूछे सारे सवालों के जवाब अभिनंदन ने इतनी निडरता से दिए, जिसे देखक कर वहां की आर्मी भी शायद डर गई होगी और सोचने पर मजबूर ही गई होगी कि ये तो सिर्फ़ एक ही भारतमाता का सपूत है, सारे मिल गए तो हमारा क्या होगा।

जिसके बाद अब सिर्फ पूरा देश यही चाहता है कि भारतमाता का ये सपूत सकुशल अपने वतन वापस लौट आए। हमारी सरकार ने भी कोशिशें शुरू कर दी है अभिनंदन को वापस लाने की। लेकिन हमारी सरकार ने जो कदम उठाये उसके बाद से शायद पाकिस्तान की अब हिम्मत नहीं की वह देश के सिपाही को ज्यादा देर तर कैद कर के रख सकती है। साथ खूशी भी है की पाकिस्तान संसद में इमरान खान ने ऐलान किया है की जल्द सिपाही (अभिनंदन) को भारत को सौंप दिया जायेगा। जिसके बाद चर्चा आम हुई की पाकिस्तान को हमारे आगे झुकना पड़ा।

हम तो यही कहना चाहेंगे, अभिनंदन पूरे देश को तुम पर नाज़ है। पूरा देश तुम्हारी सलामती के लिए दुआ कर रहा है औए तुम्हारा अभिनदंन करने के लिए तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।

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बच्चों को दें सभ्यता की शिक्षा

बच्चों को दें सभ्यता की शिक्षा

मेरी भी सुनो : बच्चों को सिखाएं आदर भाव : अभी तक आपके बच्चे छोटे थे, उनके लिए ये दुनियाँ नई थी, आपके साथ वो इसे समझने की कोशिश कर रहे थे। अब वो बड़े हो रहे हैं, लेकिन अब समय है उन्हें सही-गलत बताने का। उनमें आदर-भाव की भावना जगाने का। चाहे वो घर के बड़ों के प्रति हो, पड़ोसियों के प्रति हो, आपके घर में काम करने वाली बाई या कॉलोनी में पहरा देने वाले गार्ड के प्रति। और हाँ सबसे पहले उन्हें भोजन के प्रति आदर-भाव रखना सिखाएं।

                                                            

1. भोजन का सम्मान : खाने में नख़रे करना हर बच्चे की आदत होती है। मनपसंद चीज़ न मिले तो वो खाने में ना-नुकुर करने लगते हैं। उन्हें बताएं कि घर में जो भी बना है वो उन्हें खाना होगा। उन की फ़रमाइश पर अलग से कुछ न बनायें। उन्हें बतायें कि जो खाना उनकी थाली में है वो कितनी मेहनत के बाद उनकी थाली में आया है। साथ ही उन्हें थाली में खाना ना छोड़ने की भी सीख दें। आपकी थोड़ी सी कोशिश से बच्चे भोजन का आदर  करना सीख जाएंगे।

                                                            

2. बड़ों का सम्मान : बच्चे सबसे पहले आप से ही सीखते हैं। अगर आप घर में अपने बड़ों का मान-सम्मान करेंगे तो वो भी आपका सम्मान करेंगे। ये मत भूलिए इसके साथ-साथ आप एक नई पीढ़ी की नींव रख रहे हैं जो आगे भी आदर-भाव की इस परंपरा को बढ़ाएगी।

                                                       

3. अपने बच्चों को सिर्फ़ घर के लोगों का ही मान करना ना सिखायें बल्कि अपने आस-पड़ोस के लोगों के साथ भी सम्मान से पेश आने की सीख दें। अपने घर में काम करने वाली बाई हो या कॉलोनी में पहरा देने वाला गार्ड, उन्हें सिखायें कि ये सब सब भी सम्मान के हक़दार हैं और हमारे जिंदगी को आसान बनाने में इनकी भी अहम भूमिका है।

                                                           

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