सरकार का युवाओं से मज़ाक

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मध्यप्रदेश : कमलनाथ के MP में बेरोजगारों को मिलेगी 'गाय हांकने' की ट्रेनिंग मध्यप्रदेश में पढ़े लिखे लोग जल्द ही आपको पशु हांकते नज़र आ सकते हैं. दरअसल, मध्यप्रदेश में बेरोज़गार युवा स्वाभिमान योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने वाले बेरोजगारों ने पशु हांकने तक की ट्रेनिंग के लिए अपना नाम लिखवाया है. वहीं बीजेपी ने इसे बेरोजगारों का मज़ाक बताया है. मध्य प्रदेश में पढ़े लिखे लोग जल्द ही आपको पशु हांकते नज़र आ सकते हैं. दरअसल, मध्य प्रदेश में बेरोज़गार युवा स्वाभिमान योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने वाले बेरोजगारों ने पशु हांकने तक की ट्रेनिंग के लिए अपना नाम लिखवाया है. वहीं बीजेपी ने इसे बेरोजगारों का मज़ाक बताया है. युवा स्वाभिमान योजना काम सिखाएंगे या देंगे, जिससे बेरोजगारों में स्वाभिमान बढ़े. लेकिन हैरानी ये जानकार होगी कि इस योजना में कमलनाथ सरकार बेरोजगारों को पशु हांकने वाले की ट्रेनिंग भी देने जा रही है. मतलब यहां बेरोजगारों को तो पशुओं को हांकने तक का काम करना होगा. कायदे से  इसके लिए सरकार ने मध्यप्रदेश में अकेले भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में 42 -42 वेकेंसी भी निकाल दी है. रोजगार ट्रेड में इलेक्ट्रिशियन, एकाउंट असिस्टेंट, मोबाइल रिपेयरिंग, ड्राइवर, फोटोग्राफर जैसे कार्यों के साथ ही पशु हांकने के काम को भी शामिल किया गया हैं. किस ज़िले में कितने पद जिले के हिसाब से पोस्ट को देखा जाए तो अकेले भोपाल जिले में इसके लिए 50 पोस्ट है. इनमें से भोपाल शहर में 42 तो वहीं बैरसिया में 8 पोस्ट निकाली गई हैं. इसके बाद इंदौर ज़िले में 106 पोस्ट, आगर जिले में 52 पोस्ट, अलीराजपुर में 25 पोस्ट, अशोकनगर में 45 पोस्ट, बालाघाट में 68 पोस्ट, बड़वानी में 64 पोस्ट, बैतूल में 83 पोस्ट, भिंड में 101 पोस्ट, बुराहनपुर में 36 पोस्ट, छतरपुर में 134 पोस्ट और छिंदवाड़ा में 163 पोस्ट रखी गई हैं. सरकार के इस कदम का मजाक बन रहा है लेकिन अब इससे भी अजीबोगरीब हालात ये है कि पशुओं को हांकने के लिए अकेले भोपाल में 12 और इंदौर शहर में 3 पदों के लिए युवा स्वाभिमान योजना के पोर्टल पर आवेदन कर चुके हैं. इस बात का भी आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेरोजगारों की परिस्थितियां उन्हें क्या-क्या करने को मजबूर कर रही हैं और क्यों कर रहीं हैं. भोपाल के ऐशबाग में रहने वाले राजू सैनी ने बीसीए किया है लेकिन बेरोजगारी का आलम ये है कि पशु हांकने के काम के लिए आवेदन करना पड़ा. राजू सैनी की मानें तो 'ये मजबूरी है कि ग्रेजुएट होकर अब पशु हांकने का आवेदन देना पड़ा. लेकिन कर भी क्या सकते हैं, कम से कम 4000 रुपये तो मिलेंगे. वहीं, बीकॉम कर चुके गौरव मिश्र का भी नाम गाय हांकने की ट्रेनिंग की सूची में है. गौरव बताते हैं कि 'सरकार को सोचना चाहिए कि जो रोजगार नहीं दे पा रही है और मजबूरी है कि हमें पशु हांकने का आवेदन देना पड़ा वरना कौन डिग्री लेकर पशु हांकना चाहता है. सरकार ने क्या कहा कमलनाथ सरकार में मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि 'कमलनाथ जी पूरी ताकत से गौशाला बनाने और गौरक्षा की बात कर रहे हैं और गाय को हम लोग माता के रूप में मानते हैं. उसका सब तरह से संरक्षण होना चाहिए. हांकने का मतलब यह नहीं कि गाय को भगाना है. मतलब यह है कि उसे संरक्षित तरीके से गौशाला में ले जाना है और उस को संरक्षित रखने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि गाय को कोई परेशानी न हो. इसलिए इसकी ट्रेनिंग दी जा रही हैं. गाय को संभाल कर गौशाला तक पहुंचाना है, गाय को कैसे पालते हैं, ये आज के नौजवान इस चीज को नहीं मानते हैं. बीजेपी ने बताया बेरोजगारों का मज़ाक बीजेपी नेता और शिवराज सरकार में मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि 'कमलनाथ सरकार ने ऐसा करके बेरोजगारों का मज़ाक उड़ाया है. क्यों कमलनाथ सरकार पढ़े लिखों से पशु हांकने का काम करवा रही है?

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