चुनावी प्रक्रिया पर दाग लगाते अफसर

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आम चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी हों  ...इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग जी जान से जुटा हुआ है | बेहतर चुनाव प्रक्रिया के लिए असामाजिक तत्वों पर नकेल कस दी गई है | उम्मीदवार को निर्देश है कि यदि कोई आपराधिक मामले मे लिप्त हो तो सार्वजनिक करें | अपील मतदाताओं से भी ...लोभ लालच में न आयें | लेकिन उफ़्फ़  ... एक  लोकसभा क्षेत्र ऐसा भी है जहां इतने महत्ब्पुर्ण कार्य की ज़िम्मेदारी एक भ्र्ष्ट्र अफसर को सौंप दी गई है ... इतना ही नहीं बल्कि बाकायदा इस बेईमान अफसर को सम्मानित भी किया जा रहा है | 

पूरा मामला मप्र की राजधानी भोपाल से महज़ 45 किलोमीटर दूर स्थित रायसेन जिले का है | जिला  ...बेशक राजधानी से पास है लेकिन नियम कायदों से दूर | यहाँ भी कुछ ऐसा ही है ....एक बीआरसी ..साहब के आगे लमलेट हुये तो सक्षम साहब ने सारे नियम कायदों की गठरी बनाकर ताक पर रख दी | आश्चर्य ...न सिर्फ इस भ्र्ष्ट्र अधिकारी को स्वीप नोडल अधिकारी बना दिया बल्कि नए नवेली बनी कमलनाथ सरकार के मंत्री से सम्मान भी करवा दिया | 

यह तिकड़मी अफसर है ....एस एस पोर्ते | सांची में बीआरसी के पद पर कुंडली मार कर जमे है | कलेक्टर साहिबा के काफी चहेते होने कारण ...पोर्ते न सिर्फ अपने कार्यालय बल्कि अपने बिभाग के आला अफसारान पर भी भारी है | आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इस अफसर को  पद का दुरूपयोग कर दस्तवेज़ों में हेराफेरी एवं फर्जीवाड़ा करने की जाँच में आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय,भोपाल ने दोषी पाया है । आयुक्त लोक शिक्षण सांचनालय ने म. प्र. सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 10(4) के अंतर्गत 4 वेतनवृद्धि रोके जाने का आदेश 1अप्रेल 2019 को जारी किया है जिसकी प्रतिलिपि कलेक्टर रायसेन को भेजी गई है | 

शिकायतों का अंबार और आयुक्त का आदेश होने के बावजूद  कलेक्टर साहिबा ने अपने चहेते भ्र्ष्ट्र अफसर को संरक्षण देते हुये सारे प्रमाणों को डस्टबिन के हवाले करते  उल्टा निर्वाचन जैसे गंभीर कार्य की अहम जिम्मेदारी साँप दी |  हद तो तब हो गई जब इन सब से अनभिज्ञ नवनिर्वाचित शिक्षा मंत्री श्री प्रभुराम चौधरी जी से विधानसभा चुनाव में उत्कृष्ट कार्य का सम्मान भी कलेक्टर महोदया ने 26 जनवरी 2019 को दिलवा दिया | कलेक्टर साहिबा का संरक्षण साफ साफ दिखता है | 

पोर्ते पर मेहरबानी इस आम चुनाव में ही नहीं बल्कि विधान सभा चुनाव में भी हुई थी | यही वजह रही कि ...स्वीप नोडल अधिकारी बनाने को लेकर कारण पूछा गया था कि कारवाई न करते हुये इस भ्र्स्ट्र अधिकारी को निर्वाचन जैसे महत्ब्पुर्ण कार्य की ज़िम्मेदारी क्यू दी गई | 

आरटीआई एक्टिवहिस्ट दीप सिंह राजपूत ने इस भ्र्स्ट्र अधिकारी का काला चिट्ठा जमा करके हर उस कार्यालय तक पहुंचाया है जहां लगा कि ऐसे भ्र्ष्ट्र अफसर पर लगाम लगाई जा सकती है | लेकिन यदि जिले के मुखिया ही सरपरस्त हो तो न्याय की बात श्याद बेमानी हो जाती है | दीप सिंह राजपूत ने हार नहीं मानी है | दस्तक दी है ...केन्द्रीय निर्वाचन आयोग के दरवाजे पर  | इस आशा से कि आयोग इस मसले को  गंभीरता से लेगा | 

आश्चर्य है कि ....उफ़्फ़ ...एक भ्र्ष्ट्र अफसर देश की निर्वाचन जैसी अहम प्रक्रिया का हिस्सा है ...ज़ाहिर है ...चुनाव की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना भी लाज़मी है |

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