नेता जी यहाँ वोट मांगने मत जाना

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<आम चुनाव से पहले बुलंद होने वाला विकास का नारा....चुनाव के दौरान दफन सा हो गया । सियासी दल चोर - चौकीदार से लेकर  मृत नेताओं की कबर तक मे जा घुसे । 
फिर ये नेता आशा करते हैं कि आम मतदाता घर से निकले और इन्हें अपने अमूल्य वोट से  नवाजें...। लेकिन कैसे करें वोट...जब बीते आज़ादी के इतने सालों बाद भी आज तक बुनियादी सुविधा से भी हैं महरूम । 
नाराज़गी जायज़ है तो कर दिया ऐलान...इस बार चुनाव का होगा वहिष्कार । 
मामला ..मप्र के  रतलाम जिले का है । बीते 70 सालों से ग्रामीण ग्राम भाटखेड़ी से आक्यादेह तक 2 किलोमीटर के मार्ग निर्माण की मांग बुलंद कर रहें है लेकिन मजाल है कि सरकारों के कान में जूं रेंग जाती । हालात ये हैं कि रोड न होने के चलते ग्रामीणों और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । खासकर बरसात में तो यह समस्या पहाड़ जैसी बन जाती है । रोड न होने के चलते यह क्षेत्र आज भी विकास की दौड़ से बाहर है । 
कांग्रेस हो या बीजेपी...कोई भी सियासी दल हो...चुनाव के वक्त मुंह दिखाई की रस्म अदायगी की और फिर पाँच साल के लिए उड़नछू ..।
ग्रामीण साफ साफ कहतें है कि वर्तमान सांसद सुधीर गुप्ता हों या फिर कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन...। जब इन नेताओं ने इस गांव का रुख बीते पाँच सालों में नही किया तो उन्हें वोट लेने का अधिकार भी नही । 
जानकारी के तौर पर गांव के चौराहों और अन्य जगहों पर बैनर - पोस्टर जड़ दिये हैं जिस पर नेताओ के लिए साफ साफ लिखा है...नो रोड - नो वोट ।
डिजिटल युग में रोड जैसी सुविधा भी न मिले तो शर्मनाक है । और हमारे लिए सवाल भी   जब सरकारें बुनियादी सुबिधा देने में ही अक्षम साबित हो रही है तो इस देश के सम्पूर्ण विकास की आशा कैसे की जाए

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